कृष्णा कान्हा रेजीडेंसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के निदेशक और विधायक राजकुमार रावत के समधी से 12 लाख रुपये की ठगी का मामला प्रकाश में आया है।
खुद को पूर्व एसडीएम बताने वाले व्यक्ति ने बिल्डर को प्रभाव में लेने के लिए 43 लाख रुपये के फ्लैट के एवज में 22 लाख का चेक काटकर दे दिया, दो बार मुलाकात के दौरान नीली बत्ती की लग्जरी गाड़ियों से आया।
चेक बाउंस होने पर बिल्डर को ठगी का पता चला। एसएसपी ने वृंदावन पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
चैतन्य विहार फेस वन निवासी मार्तण्ड देव पुत्र कपिल देव ने एसएसपी को दिए प्रार्थना पत्र में बताया है कि रमणरेती स्थित कृष्णा कान्हा रेजीडेंसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी है, जहां फ्लैट निर्माण कर बिक्री का कार्य किया जाता है।
पिछले दिनों नीली बत्ती लगी गाड़ी से कार्यालय में आए व्यक्ति ने अपना नाम सुशील कुमार पुत्र सूरजपाल सिंह निवासी 15 ए नोएडा बताते हुए 43 लाख रुपये में एक फ्लैट खरीदने की बात कही। उसी दिन अपने अलीगढ़ की स्वर्ण जयंती नगर स्थित इलाहाबाद बैंक के खाते से 22 लाख का चेक उन्हें दिया।
उसने स्वयं को मैनपुरी का पूर्व एसडीएम भी बताया। उन्हें विश्वास में लेने के बाद उसके अपने तबादले के लिए 12 लाख रुपये की आवश्यकता बताते हुए 22 लाख रुपये के चेक की एवज में निजी खाते से आरटीजीएस कराने का अनुरोध किया।
वह ठग की बातों में आ गए और 27 जनवरी को अपने वृंदावन के इंडियन ओवरसीज बैंक के खाते से उसके खाते में 12 लाख रुपये आरटीजीएस द्वारा डाल दिए।
साथ ही उसके दिए गए चेक को बैंक में रियलाइजेशन के लिए डाला, लेकिन चेक डिसओनर हो गया। इससे उन्हें शक हुआ और पूछताछ में पता चला कि उसने अपने खाते से 29 जनवरी को दस लाख रुपये निकाल लिए हैं।
इस संबंध में बिल्डर के समधी और विधायक राजकुमार रावत के साथ पीड़ित ने एसएसपी डा. राकेश सिंह को मामले से अवगत कराया।