यमुना एक्सप्रेसवे पर 13 अगस्त का दिन काला शनिवार साबित हुआ। यहां दो हादसों में आठ लोगों की मौत के बाद चार अन्य हादसों में भी चार लोग घायल हो गए।
शुक्रवार रात आगरा से नोएडा की ओर जा रहे कंटेनर के चालक को थाना मांट क्षेत्र में माइल स्टोन 105 के समीप झपकी आ गई। इससे अनियंत्रित कंटेनर आगे चल रहे ट्रक से टकरा गया। घटना में कंटेनर चालक सलमान निवासी मैनपुरी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया।
शुक्रवार रात को ही आगरा से नोएडा जाने के दौरान एक स्विफ्ट डिजायर कार थाना महावन क्षेत्र में माइल स्टोन 121 के समीप अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा कर पलट गई। हादसे में कार सवार दो लोगों को चोट आई और कार क्षतिग्रस्त हो गई। इसके अलावा आगरा जाने के दौरान एक वैगनआर कार चालक को थाना राया क्षेत्र में माइलस्टोन 111 के समीप झपकी आ गई। इससे कार अनियंत्रित होने पर डिवाइडर से टकरा कर पलट गई।
घटना में कार चालक संदीप निवासी कमला नगर आगरा घायल हो गए। शनिवार तड़के आगरा की ओर जा रहा कंटेनर सुरीर क्षेत्र में माइल स्टोन 77 के समीप चालक को झपकी आने के कारण डिवाइडर से टकराकर पलट गया। कंटेनर चालक अनिल निवासी किशनी, मैनपुरी को चोट आईं।
12 दिन में 14 की मौत
यमुना एक्सप्रेसवे पर अधिकतर हादसे ओवरस्पीड के कारण हो रहे हैं। इसके अलावा वाहनों के टायर फटना भी एक वजह है। बीते 12 दिन में ही लगभग 14 हादसों में 14 लोगों की मौत हो चुकी है। करीब 40 लोग घायल हुए। जिले में 42 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे पर अगस्त माह में एक भी दिन बिना हादसे के नहीं गुजरा है।
आंकड़ों पर गौर करें तो हर 24वें घंटे में एक्सप्रेसवे पर हादसे में एक मौत हो रही है। दो अगस्त से 13 अगस्त तक 14 हादसे हुए। सबसे अधिक हादसे टायर फ टने से हुए। रफ्तार की इस सड़क पर अक्सर लोग गति का ध्यान भी नहीं रखते हैं। ऐसे में वाहनों के टायर गर्म होकर फ ट जाते हैं। आवारा जानवर आ जाने और चालक को झपकी आने के कारण भी हादसोें की संख्या बढ़ रही है। सबसे अधिक हादसे मथुरा जिले के सुरीर और नौहझील क्षेत्र में होते हैं।
हादसे दर हादसे
2 अगस्त - थाना मांट क्षेत्र में माइलस्टोन 100 के समीप कार पलटी। चरन सिंह (30) की मौत, साथी युवक सुंदर घायल।
4 अगस्त- थाना नौहझील क्षेत्र में माइल स्टोन 62 के समीप मुकेश पुत्र खजान सिंह निवासी गांव सिनसिनी थाना डीग जिला भरतपुर की सड़क पार करने के दौरान मौत। थाना मांट क्षेत्र में माइलस्टोन 92 पर कैंटर पलटा। कमलेश निवासी विकासपुरी थाना तिलक नगर दिल्ली समेत चार घायल।
5 अगस्त- होंडा अमेज कार वाहन से टकराकर पलटी। तीन घायल।
6 अगस्त- कोतवाली सुरीर क्षेत्र में माइल स्टोन 80 के निकट डस्टर कार कैंटर से टकराई। कार सवार अंजली निवासी शिवपुरी मध्यप्रदेश की मौत। पति निखिल गोयल, बेटा पीहू, बेटी परी, चालक मनोज शर्मा गंभीर रूप से घायल।
7 अगस्त - थाना महावन क्षेत्र में माइल स्टोन 116 के समीप कार सही करने के दौरान वाहन से टक्कर में चालक की मौत।
8 अगस्त - माइल स्टोन 82 के समीप अनियंत्रित कार रेलिंग में घुसी। कार चालक समेत तीन लोग घायल। थाना सुरीर क्षेत्र में माइल स्टोन 92 के समीप कैंटर चालक को झपकी आ गई। कैंटर सवार एक व्यक्ति घायल।
10 अगस्त- नौहझील क्षेत्र में माइलस्टोन 67 के समीप टाटा कंटेनर ने खड़ी बस में टक्कर मारी। बस चालक अमानत अली निवासी भिंड, पंकज, अभिलाख, पुष्पा देवी निवासी गांव गदा भिंड, रामस्वदेश निवासी विदिशा, अरविंद शर्मा निवासी गांव कनोर भिंड और अमित निवासी इटावा घायल।
एक्सीडेंटल जोन
तेज रफ्तार सफर के साथ-साथ यमुना एक्सप्रेसवे हादसों का क्षेत्र भी बनता जा रहा है। नौ अगस्त 2012 को शुरू हुए एक्सप्रेसवे पर हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे। शुरुआती दिनों में वाहनों के लिए लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रख कर गति पर नियंत्रण रखने के लिए नियम लागू करने के वादे किए गए थे। कुछ दिन बाद सब हवाई साबित हुआ। सड़क पर जगह-जगह रिफ लेक्टर भी नहीं हैं। रोशनी का इंतजाम नहीं है। स्पीडोमीटर लगाकर टोल प्लाजा पर वाहन चालक से जुर्माना वसूलने की योजना भी लागू नहीं हो सकी है। एक्सप्रेसवे से उतरने और चढ़ने के लिए भी कई रैंप बने हैं।
घायलों को ग्रेटर नोएडा ले जाने पर सवाल
यमुना एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों में घायलों को सीधे ग्रेटर नोएडा ले जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि एक्सप्रेसवे पर तीन टोल प्लाजा आगरा के खंदौली, मथुरा के मांट और बुलंदशहर के जेवर इलाके में हैं। इन जिलों में भी बेहतर अस्पताल हैं। यहां घायलों को तत्काल चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराई जा सकती है। लोगों के अनुसार अधिकतर हादसों में घायलों को ग्रेटर नोएडा ही ले जाया जाता है।
खटारा वाहनों को रोकने के इंतजाम नहीं
एक्सप्रेसवे पर हर रोज लगभग 15 हजार वाहन गुजरते हैं। बताया गया है कि इसमें कई वाहन दिन बिना फि टनेस और बीमा के दौड़ रहे हैं। इसमें भारी वाहन से लेकर निजी वाहन भी शामिल हैं। इस तरह के वाहनों को रोकने के एक्सप्रेसवे प्रबंधन पर कोई इंतजाम नहीं है। प्रशासन और परिवहन विभाग के अधिकारी भी ध्यान इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। वाहन चेकिंग के नाम पर वसूली की जाती है।
कैंटर सबसे बड़ा खतरा
एक्सप्रेसवे पर नियमों को दरकिनार कर दौड़ने वाले कैंटर सबसे अधिक खतरा बन रहे हैं। एक्सप्रेसवे पर इनकी संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। कैंटर की लंबाई अधिक होने के कारण दर्जनों घटनाएं हो रही हैं।