सुरीर में डायरिया से पांच बच्चों की मौत हो गई है जबकि 100 से ज्यादा बीमार हैं। मरने वालों में तीन बच्चे ईंट भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों के हैं। जबकि एक बालक की मौत नया बांस गांव में हुई है और दूसरे की परसौतीगढ़ी गांव में। इस समय यहां कई इलाके डायरिया की चपेट में हैं। सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर मरीजों की भीड़ लग रही है।
डायरिया से नया बांस गांव में दो साल के रविंद्र और परसौती गढ़ी गांव में पांच साल के समीर की मौत हो गई। वहीं सुरीर में ईंट भट्टों पर काम करने वाले मजदूरों के तीन बच्चों की मौत हो गई। इनमें शांति (5), विवेक (2) और विकास (4) हैं। वहीं, गांव सुरीर के करीब के गांव सामौली निवासी मुस्कान (3), कुमकुम (2) , मौना (6) , कोमल नगला हरिया निवासी जय,
भूरा, नगला ओहवा निवासी सीमा देवी, पीयूष, हनी, जगवीर, गीता विनीता, बिंदपुर निवासी बाबी सहित सैकड़ों बच्चे और बुजुर्ग उल्टी-दस्त, डायरिया के शिकार हैं। इनमें से कई रोगी मांट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सौ शैय्या वृंदावन में भर्ती हैं। जबकि बड़ी संख्या में मरीज झोलाछापों के यहां अपना इलाज करा रहे है। उधर, गांव सरकोरिया, बैकुंठपुर, नगला हरिया,
हरनौल, परसोती गढ़ी और नयावास में भी डायरिया ने पांव पसार दिए हैं। लोगों का आरोप है कि नव प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुरीर पर चिकित्सक की तैनाती नहीं है। लाखों रुपये से बना अस्पताल का भवन धूल फांक रहा है। कुलदीप लवानियां, श्याम सुंदर फौजी का कहना है कि यहां कोई डॉक्टर नहीं है। लोग परेशान होकर झोलाछापों से इलाज कराने को मजबूर हैं। उन्होंने सभी गांवों में डॉक्टरों की टीम भेजने की मांग की है।
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स्वास्थ्य विभाग का मौतों से इंकार, टीमें भेजी
डायरिया से मौत होने की बात गलत है। डायरिया की सूचना पर तीन अलग-अलग स्थानों से चिकित्सकों की टीमें भेजी थी। उन्होंने करीब 100 रोगियों को दवा दी है। कल भी डॉक्टरों की टीमें भेजी जाएगी।
-डॉ.आके नैय्यर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी