मथुरा। दिवाली पर पटाखों की बिक्री के लिए जिला प्रशासन ने 11 स्थानों पर अनुमति दी है। खुले मैदानों में लगे पटाखा बाजारों में अस्थायी दुकानें खुलते ही ग्राहक उमड़ने लगे हैं, लेकिन ज्यादातर बाजारों में सुरक्षा इंतजाम के नाम पर कुछ भी नहीं है। स्थानीय पुलिस की मनमानी भी चल रही है। इससे अस्थायी लाइसेंस लेकर आने वाले दुकानदार परेशान हैं। जिला प्रशासन ने 11 स्थानों के लिए 504 लाइसेंस जारी किए हैं।
ज्यादातर पटाखा बाजारों में रेत या बालू के 10 -5 किलो के ढेर, ड्रम रखे हैं मगर उनके पानी की नाममात्र का रखा हुआ है। दुकानों के बीच की दूरी भी मानके अनुरूप तीन मीटर नहीं रखी गई है। स्थानीय पुलिस को ही पटाखा बाजारों में इंतजाम की जिम्मेदारी दे दी गई है। शहर में ईंट मंडी जमुनापार, रामलीला मैदान, ट्रांसपोर्ट नगर में मंशा टीला के पास, गोविंद नगर में, नवीन सर्किट हाउस मैदान के अलावा वृंदावन, मांट, बलदेव आदि में खुले मैदानों में बाजार लगाए गए हैं।
ईंट मंडी, सदर के पटाखा बाजार में 85 आवेदकों ने आवेदन किया था, जिनमें से 55 दुकानदारों ने अस्थायी दुकानें लगाई हैं। यहां पानी के लिए जो ड्रम रखे हैं, उनमें आधे से कम पानी मिला। वहीं बालू के ढेर भी दिखावे के लिए रखे गए थे। अस्थायी दुकानों के बीच भी दूरी भी तीन मीटर नहीं थी। ऐसे में कोई हादसा होता है तो कौन जिम्मेदार होगा। अग्निशमन विभाग की टीमों ने भी इंतजाम देखने की जहमत नहीं उठाई है।
यह हैं नियम
1- हरित आतिशबाजी का स्टॉक 45 किलो से अधिक नहीं होना चाहिए।
2- बिक्री के स्थान पर ड्राई पाउडर, फायर एस्टिंग्यूशर, 200 लीटर का पानी का ड्रम, बालू, पानी की दो बाल्टी
3- धूम्रपान निषेध का बोर्ड, साथ ही किसी भी तरह के ज्वलनशील पदार्थ को नहीं रखा जाएगा।
4- मोमबत्ती, लालटेन या पेट्रोमैक्स आदि की रोशनी नहीं करनी होगी।
राया पटाखा बाजार में हो चुका है भीषण अग्निकांड
राया कस्बे में हरित आतिशबाजी बाजार में 12 नवंबर, 2023 को भीषण अग्निकांड हुआ था, जिसमें दो विक्रेताओं की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 20 से ज्यादा लोग झुलसे थे। हादसे में बाद में मृतक संख्या 12 पर पहुंची थी। इस हादसे के बाद से राया में पटाखा बाजार नहीं लगाया जाता है।