गांव चंदौरी में दो बार कपास की फसल में नुकसान होने के सदमे से किसान की मौत हो गई। गांव के चरन सिंह ने कोतवाली छाता में दी तहरीर में कहा है कि उसके भाई लक्ष्मन ने खेत में दो बार कपास की फसल की बुवाई की थी। दोनों बार नुकसान हुआ। बीज उगा ही नहीं।
चरन ने एसडीएम से मृतक के आश्रितों को किसान दुर्घटना बीमा का लाभ दिलाने की मांग की है। चंदौरी गांव में किसान लक्ष्मण (46 वर्ष) अपने परिवार के साथ जैसे-तैसे बटाई पर जमीन लेकर खेती-किसानी करता था। दो साल से वह कपास की फसल बो रहा था। उसके बीज
उसने बाजार से लिए थे। पिछले साल फसल का एक दाना भी नहीं उगा। लेकिन लक्ष्मन ने आस नहीं छोड़ी, इस साल अच्छी फसल की उम्मीद में उसने दोबारा कपास के बीज बोए। इस बार भी बीज नहीं फूटा। 10 मई को वह निराशा में खेतों में बोए बीजों को निकालकर देख
रहा था, इसी दौरान उसकी सदमे से मौत हो गई। परेशान और हताश परिजनों ने उसका अंतिम संस्कार कर दिया। गमगीन परिजनों का कहना है कि लक्ष्मन ने दो बीघा खेत बटाई पर लिया था। उस पर कोई कर्ज तो नहीं था लेकिन किसानी के अलावा परिवार के पास कमाई का
कोई दूसरा जरिया भी नहीं है। परिजनों का आरोप है कि खेतों पर बीज फूट नहीं रहा था, लक्ष्मन ने वह बीज बाजार से लिए थे। उधर, किसान की दुखद मौत पर किसी भी स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी, समाजसेवी व नेताओं के न पहुंचने से ग्रामीणों में काफी रोष है।