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कम तापमान गेहूं किसानों को देगा बंपर तोहफा

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मथुरा। इस बार मौसम की जल्दबाजी किसानों के लिए बंपर तोहफा देने वाली है। विगत करीब 19 वर्ष बाद नवंबर से शुरू हुई ठंड के मौसम ने किसानों के चेहरे पर रौनक ला दी। 90 प्रतिशत गेहूं की बुवाई कर चुके किसान अब सिर्फ उसकी रखवाली कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि ठंड के मौसम में कम तापमान उन्हें बंपर पैदावार मिलेगी।
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विगत 19-20 वर्षों से प्रकृति का चक्र बिगड़ा हुआ था। इसके चलते ठंड का मौसम दिसंबर के आखिर मेें शुरू होता था, परंतु इस बार ठंड का मौसम नवंबर से ही शुरू हो गया है और किसानों ने भी समय से गेहूं की बुवाई कर दी। अभी तक जनपद में करीब एक लाख, 85 हजार हेक्टेयर में किसान फसल की बुवाई कर चुके हैं। मौसम के चलते गेहूं की कोपल निकलना शुरू हो चुकी हैं।
धूप से जल्द ही कोहरा आएगा
हां ऐसा लग रहा है कि इस दफा मौसम ने जल्द ही तापमान कम कर दिया है। इससे गेहूं की फसल जोरदार होगी। वर्तमान में जो धूप निकल रही है, उससे कोहरा भी आने की उम्मीद बढ़ी है। कोहरा से गेहूं में और भी फायदा होगा।
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- बच्चू सिंह, निवासी हरनौल किसान
इस बार गेहूं के अच्छे होने के आसार
ठंड का मौसम जल्द ही शुरू हो गया है, इसलिए गेहूं की पैदावार भी अच्छी होने की उम्मीद है। अधिकतर किसानों ने गेहूं बो दिया है, अब वह धीरे-धीरे कुला फोड़ेगा। आने वाली ठंड से गेहूं जल्द ही तैयार हो जाएगा।
- शैलेंद्र सिंह, निवासी बेरा मांट
गोवर्धन पूजा के दिन बारिश ने बिगाड़ा खेल
गोवर्धन पूजा के दिन जो बारिश और ओला वृष्टि हुई थी, उससे जो गेहूं की फसल बो दी थी, उससे बोई गई फसल बेकार हो गई और किसान को दोबारा फसल बोनी पड़ी है। इससे बहुत से किसानों को नुकसान भी हुआ है और उसे दोबारा फसल बोनी पड़ी है ।
- तेजपाल, इनायतगढ़ नौहझील
लॉक डाउन या पराली रोकना बना वरदान
जल्द ही ठंड का आना दो कारणों से माना जा रहा है। एक कारण यह कि इस दफा कोरोना वायरस के चलते जो लॉकडाउन हुआ है उससे प्रकृति अपने मूल स्वरूप में लौटी है। वहीं कृषि विभाग द्वारा पराली भी जलाने से रोकी गई हैं और उससे प्रदूषण कम हुआ है।
इस बार गेहूं की फसल अच्छी होगी
इस बारे गेहूं की फसल अच्छी होगी। इसका कारण विगत 19-20 वर्ष मेें ठंड के मौसम का समय पर आना है। इसका कारण पराली जलाने पर नियत्रंण किया जाना है। पिछले वर्ष 464 स्थानों पर पराली जली थी अब की दफा मात्र 161 स्थानों पर ही पराली जली है। यह पराली खेतों में ही डाली गई है, जिससे भी किसान की पैदावार बढ़ेगी।
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- धुरेंद्र कुमार, उप कृषि निदेशक।
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