देर शाम तक रिहाई की उम्मीद एक बार फिर टूट गई। विधिक प्रक्रिया में तकनीकी खामी के चलते जेल में बंद किसान कैदी गुरुवार को भी रिहा नहीं हो सके। गुुरुवार को दिनभर चली किसान कैदियों को रिहा करने की प्रक्रिया देर शाम तक पूरी नहीं हो सकी। विधिक प्रक्रिया में तकनीकी खामी होने के कारण यह स्थिति बनी। अब उम्मीद जाहिर की जा रही है कि शुक्रवार को तकनीकी खामी की जांच पड़ताल के बाद 11 में से किसान कैदियों को रिहा किया जाएगा।
16 साल से मुआवजा के लिए परेशान गोकुल बैराज डूब क्षेत्र से प्रभावित किसानों के एक नवंबर को धरना के दौरान हुए उपद्रव में पुलिस ने 11 किसानों को जेल भेजा था। पिछले सप्ताह सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इनकी जमानत स्वीकार कर ली। कोर्ट के आदेश पर गुरुवार को सात किसानों को देर शाम जेल से रिहा करने की प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन देर शाम चली जांच में तकनीकी खामी सामने आ गई।
इससे 11 में से रिहा होने वाले सात कैदियों में शामिल रोहन सिंह, किशोर, रामरतन, भोपाल दास, हेमंत, चंकी चौधरी, विनोद जेल से बाहर नहीं निकल सके। इनके अलावा चार और किसान कैदियों में शामिल कुंवर सिंह निषाद, लक्ष्मन बाबा, प्रवीन चौधरी और मनोज को अभी रिहाई नहीं मिलेगी।
इन्हें जमानत एक नवंबर के उपद्रव के मामले में तो हो गई, परंतु तीन जनवरी को हवालात पर मारपीट की घटना के बाद नया केस दर्ज होने के कारण उन्हें जेल से रिहा नहीं किया जा रहा है। इस केस में 13 जनवरी को जमानत को सुनवाई होनी है।
इधर, गुरुवार को भी किसानों का गांव दामोदरपुरा में धरना और क्रमिक अनशन जारी रहा। तेज ठंड के बावजूद किसान 68वें दिन भी धरना और 56वें दिन क्रमिक अनशन पर बैठे रहे। यहां किसान वक्ताओं ने पुलिस और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर आक्रोश जाहिर किया।
धरना की अध्यक्षता किशन निषाद ने की। संचालन रूप किशोर बघेल ने किया। सत्यप्रकाश, भगवती, ऊदल, ढाल सिंह, चंद्रपाल, रामबाबू, बालकिशन, वंशी, ठालू, मानसिंह, रामजीलाल, भगवत सिंह, मनोज, आदित्य रमन, सुगठ सिंह, ब्रजजोहन, भंवर सिंह आदि मौजूद रहे।