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सिसकियों से गूंजते घर में पापा को खोज रहे बच्चे

Sun, 12 Apr 2015 11:28 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला मथुरा
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कुदरत का कहर बनकर आई बरसात और ओलावृष्टि ने सिर्फ फसलें तबाह नहीं कीं, कई खिलती जिंदगी के उपवन भी उजाड़ दिए हैं। कर्ज में डूबे रणवीर की आत्महत्या का असर कितना दूरगामी है, इसे अमर उजाला की टीम ने रविवार को महसूस किया।
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अपनों के छोटे से आंगन में खुशहाल सपनों की माला पिरोने वाली कल्पना को विश्वास ही नहीं हो रहा कि उनके पति अब इस दुनिया में नहीं है। दो मासूम खेलते-खेलते घर में रोेने की आवाज सुनते तो जो हुआ वह समझ नहीं पाते। बस इतना कि खेल से मन ऊबने पर हर आने-जाने वाले एक सवाल पूछ लेते हैं कि- पापा कहां हैं?      

नंदगांव के नाहर सिंह मोहल्ला में शुक्रवार को जब लोगों ने रणवीर की पंखे से लटककर जान देने की बात सुनी तो हतप्रभ रह गए थे। रविवार को जब टीम किसान के घर पहुंची तो सांत्वना देने वालों का तांता था। आंसुओं का सैलाब समेटे बिलख रही कल्पना से तो बातचीत मुमकिन नहीं थी।
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नौहरे में खेल रहे बेटे प्रिंस और हनी पापा के बारे में पूछने लगे। कुछ बात रणवीर के बड़े भाई हरी सिंह से जरूर हुई तो उन्होंने बताया कि खेतों में ओलावृष्टि के बाद रणवीर पूरी तरह टूट गया था। खेती से बचे समय में ड्राइवरी करता था। उसकी दिन-रात मेहनत का मकसद जल्दी से जल्दी डेढ़ लाख रुपये का कर्ज चुकता करना था। फसल नष्ट हुई तो कर्ज के साथ गृहस्थी की चिंता सताने लगी। शायद यही गम उसे झकझोर गया।
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