नेपाल को अपने संविधान की आवश्यकता काफी समय से थी। देश के सभी राजनैतिक दलों और संगठनों की सहमति लेकर ही इस नए संविधान का निर्माण किया गया है।
यह बात मंगलवार को नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री खिलराज रेग्मी ने ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में दर्शन के बाद पत्रकार वार्ता में कही। इस दौरान उन्होंने नेपाल के भारत-चीन के साथ संबंधों पर भी चर्चा की।
हाल ही में लागू हुए नेपाल के संविधान के बारे में उन्होंने कहा कि नए संविधान में कुछ कमियां रह गई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए संविधान सभा प्रयास कर रही है। वर्तमान संविधान में नेपालवासियों के बेहतर जीवन और मौलिक अधिकारों के लिए प्रावधान हैं।
वहीं प्रांतीय मॉडल वाले नए संविधान के खिलाफ नेपाल सरकार के विरुद्ध सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे मधेसी दलों को मनाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार इनकी मांगों पर गंभीरता से विचार कर रही है।
भारत और चीन से अपने संबंधों को वरीयता देते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देशों से हमारे वर्षों पुराने संबंध हैं। परिस्थितियों के कारण उतार-चढ़ाव आता रहता है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि नेपाल पुराने संबंधों को तोड़ना चाहता है। इस अवसर पर आनंद किशोर गोस्वामी और जुगल गोस्वामी भी उपस्थित थे।