जब शहर में शोर हुआ तो अफसरों की भी नींद टूटी। अमर उजाला में शुक्रवार को ‘सीडीपीओ दफ्तर में डेढ़ रुपये के बाल मजदूर’ शीर्षक से प्रकाशित खबर का सीडीओ ने संज्ञान लिया। बाल मजदूरी कानूनन अपराध है, यह कहते हुए उन्होंने मामले की जांच करवाने और दोषियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है।
बता दें कि जिला पंचायत परिसर स्थित बाल विकास परियोजना अधिकारी देहात के कार्यालय में ट्रकों से पंजीरी के बोरे उतारने का काम बच्चों से करवाने का मामला सामने आया था। अमर उजाला में 19 जून के अंक में पेज दो पर यह खबर प्रमुखता से प्रकाशित की। इसमें बताया गया था कि सीडीपीओ देहात के दफ्तर में यह पंजीरी बच्चों के पोषण के लिए आती है।
इनके बोरे ट्रक से उतारने के लिए बच्चों को लगाया गया था। इतना ही नहीं ट्रक से बोरा उतारने के लिए मिलने वाली दो रुपये प्रति बोरा मजदूरी में से 50 पैसे कमीशन देने के बाद बच्चों को मजदूरी मिल रही थी। पूरा प्रकरण सीडीपीओ देहात कार्यालय में मौजूद संबंधित अफसर, लिपिक और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के सामने था लेकिन सब मौन थे। इसके बारे में जब प्रभारी डीपीओ अनिल दता से पूछा गया तो वे विभागीय लोगों के बचाव में जुट गए।
शुक्रवार को मुख्य विकास अधिकारी आंद्रा वामसी ने खबर का संज्ञान लेने के बाद जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच एसडीएम करेंगे और दोषी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि बाल मजदूरी कानूनन अपराध है। यह मामला तो सरकारी दफ्तर का है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। सरकारी अधिकारी या फिर प्राईवेट फर्म जो भी जिम्मेदार होंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।