प्रदेश की सियासत में भूचाल लाने वाले जवाहर बाग प्रकरण की जांच शुरू हो गई है। एसपी सिटी और थानाध्यक्ष समेत 29 लोगों की मौतों के राज अब जवाहर बाग से खोदे जाएंगे। न्यायिक जांच आयोग ने 14 बिंदुओं पर रिपोर्ट तलब कर ली है। वर्ष 2014 से लेकर हिंसा से पहले तक बाग को खाली कराने के लिए क्या प्रयास किए गए सहित सभी बिंदुओं पर बयान लेने का सिलसिला शुरू हो गया है।
जवाहर बाग हिंसा का सूत्रधार रामवृक्ष यादव मार्च, 2014 में 500 लोगों के साथ यहां पहुंचा था। सत्याग्रह के नाम पर प्रशासन से दो दिन की अनुमति ली और फिर यहीं जम गया। 500 की भीड़ कब 3000 में बदल गई किसी को पता ही नहीं चला। हालांकि अधिकारी कहते हैं कि समय-समय पर प्रयास होते रहे लेकिन भीड़ अधिक होने के कारण बल का प्रयोग नहीं किया जा रहा था। खैर 2 जून को बाग खाली कराने अफसर पहुंचे तो बड़ी हिंसा हो गई। पुलिस अधिकारियों समेत 29 लोगों की जान चली गई। अब न्यायिक आयोग ने इस पूरी हिंसा को लेकर जांच शुरू कर दी है।
इन बिंदुओं पर जांच
1- जवाहर बाग में लोगों को घुसने की अनुमति किसने दी और क्यों दी
2- मार्च 2014 से 2016 तक बाग खाली कराने को क्या-क्या प्रयास हुए
3- प्रशासन ने कितनी दफा नोटिस जारी किए
4- लगातार होने वाले नुकसान पर भी अफसर क्यों खामोश रहे
5- शासन को कितनी दफा जवाहर बाग के लिए रिपोर्ट भेजी
6- फोर्स की मांग कब और किससे की गई थी
7- कितनी दफा पुलिस और प्रशासनिक अफसर जवाहर बाग खाली कराने बाग में पहुंचे
8- खुफिया विभाग समय-समय पर क्या रिपोर्ट प्रशासन को देता रहा
9- जवाहर बाग में रसद पहुंच रही है इसकी जानकारी होने पर क्या किया
10- जवाहर बाग को खाली कराने के लिए क्या प्लान प्रशासन ने बनाया था
11- 2 जून को जब हिंसा हुई तो उस दौरान कितने अधिकारी मौजूद थे
12- हिंसा के बाद जवाहर बाग से होने वाली बरामदगी
13- हिंसा में मरने वालों की शिनाख्त के वैज्ञानिक आधार
14- रामवृक्ष की वैज्ञानिक पहचान के लिए होने वाले प्रयास
रामवृक्ष की मौत का वैज्ञानिक आधार नहीं पुलिस पर
रामवृक्ष मर गया। पुलिस ने गृह विभाग को भी 4 जून को यह रिपोर्ट भेज दी थी। लेकिन रामवृक्ष मर गया इसका कोई वैज्ञानिक आधार अभी तक पुलिस के पास नहीं है। पुलिस ने उसका डीएनए सैंपल तो ले लिया था लेकिन किसी से मिलान नहीं हो पाया है। अदालत ने भी पिछले दिनों इसे लेकर टिप्पणी की थी। अदालत ने कहा था कि जब तक पुलिस कोई वैज्ञानिक आधार नहीं देगी उसे मरा नहीं माना जा सकता।
40 अफसरों से होगी पूछताछ
मार्च 2014 से 2 जून 2016 तक रहने वाले सभी पुलिस और प्रशासनिक अफसरों से पूछताछ की जानी है। इसके लिए सभी को नोटिस जारी होगा। न्यायिक आयोग के अध्यक्ष ने इस संबंध में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। मौजूदा समय में यह अफसर कहां हैं, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है।