मथुरा। छात्रवृत्ति के करोड़ों रुपये के घोटाले के बाद शिक्षण संस्थाओं की जांच के लिए बैठाई नोडल अधिकारियों की समिति के पास शिक्षण संस्थाओं के संचालक आ ही नहीं रहे हैं। जनपद के 126 महाविद्यालयों में से मात्र 42 शिक्षण संस्थाओं के संचालकों ने ही अपना डाटा नोडल अधिकारियों को दिया है, जबकि एक भी विवि संचालक नोडल अधिकारियों के पास नहीं आया। नोडल अधिकारियों के साथ उच्च शिक्षण संस्थाओं के इस रवैये को देखते हुए समाज कल्याण अधिकारी ने जांच से बचने वाली शिक्षण संस्थाओं के मौके पर पहुंचकर जांच करने के निर्देश दिए हैं।
छात्रवृत्ति घोटाले के प्रकाश में आने के बाद शासन ने उच्च शिक्षण संस्थाओं की 14 बिंदुओं की जांच के लिए जांच समिति गठित कर दी। डिग्री कॉलेज के प्रवक्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच समिति में डॉ. सतेंद्र सिंह चाहर, डॉ. धर्म सिंह, डॉ. जीत सिंह व डॉ. प्रिया शामिल हैं। इनके द्वारा विगत 18 जनवरी से समाज कल्याण विभाग में बैठकर उच्च शिक्षण संस्थाओं की 14 बिंदुओं पर जांच की जा रही है। इनमें मान्यता से लेकर शिक्षण संस्थाओं में सीट, शिक्षकों का अनुमोदन आदि सहित 14 बिंदुओं की जांच रिपोर्ट तैयार करनी थी।
समिति के अनुसार 3 फरवरी को उनके पास कुल 126 कॉलेज में से सिर्फ 42 महाविद्यालय ही आ सके हैं। इनमें से 35 महाविद्यालय 14 बिंदुओं पर फेल हैं। अधिकतर महाविद्यालयों में न तो शिक्षकों का अनुमोदन लिया गया है और न ही छात्रों के छात्रवृत्ति से संबंधित मानक ही पूर्ण हैं। इसके अलावा जनपद की वर्तमान में मौजूद तीन विश्वविद्यालयों में से एक भी विवि जांच के लिए आगे नहीं आया। समाज कल्याण अधिकारी रमाशंकर गुप्ता ने बताया कि नोडल अधिकारियों की समिति द्वारा की जा रही जांच के बाद ही पता चलेगा कि जांच की रिपोर्ट क्या है।