अधिक तीव्रता का भूकंप भगवान श्रीकृष्ण की नगरी को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। यहां 135 से ज्यादा प्राचीन भवन हैं, जिनमें भूकंप रोधी कोई उपाय नहीं हैं।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान और मंदिर श्रीद्वारिकाधीश भी इसमें शामिल हैं। मथुरा अत्यंत प्राचीन शहर है। इसकी गिनती सप्तपुरियों में होती है। भले ही इस श्रेणी की इमारत अब यहां न हों लेकिन सौ और दो सौ साल पुरानी इमारत बहुतायत में है। इनमें से ज्यादातर जर्जर इमारतें शहर के बीच में ही स्थित हैं। अधिक तीव्रता का भूकंप इन्हें जमींदोज कर सकता है।
इस संभावना को देखते हुए गुजरात के कच्छ में आए भूकंप के बाद मथुरा-वृंदावन में इमारतों को चिन्हित किया गया था। इस दौरान 135 से ज्यादा ऐसी इमारत सामने आई थीं जो 100 साल से ऊपर की हैं। इस स्थिति को देखते हुए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने इनके भवन स्वामियों को नोटिस जारी करते हुए भूकंप रोधी उपाय करने के निर्देश दिए थे। इसमें श्रीकृष्ण जन्मस्थान, मंदिर श्रीद्वारिकाधीश, राजकीय इंटर कालेज, चंपा अग्रवाल इंटर कालेज सहित कई इमारत शामिल थीं।
नए भवनों में भूकंपरोधी उपाय अनिवार्य हैं। बगैर इसके भवनों का नक्शा भी स्वीकृत नहीं किया जाता है। पुराने भवनों के संदर्भ में किसी दुर्घटना से बचने के लिए संबंधित उपाय करने के लिए नगर पालिका के साथ विचार-विमर्श किया जाएगा। इस संदर्भ में पूर्व में की गई कार्रवाईयों का भी संज्ञान लिया जाएगा।
एसबी सिंह
सचिव, एमवीडीए