एक मां के कलेजे का टुकड़ा नर्स बनकर आई महिला उठाकर ले गई लेकिन महिला अस्पताल प्रशासन ने इस घटना से सबक नहीं सीखा है। घटना के बाद जिलाधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों को अस्पताल प्रशासन ने हवा में उड़ा दिया।
मंगलवार को पूरा अस्पताल का स्टाफ रंग-बिरंगे कपड़ों में था। बता दें कि सोमवार को महिला अस्पताल में भर्ती एक महिला के नवजात शिशु को नर्स बनकर रह रही महिला लेकर भाग गई। इस सनसनीखेज घटना से स्वास्थ्य विभाग के साथ पुलिस और प्रशासन में भी हड़कंप मच गया।
मौके पर पहुंचे डीएम राजेश कुमार को परिवारीजनों ने बताया यहां स्टाफ, चिकित्सक यूनीफार्म नहीं पहनते इसलिए वो फर्जी नर्स को नहीं पहचान सके।
मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने अस्पताल प्रशासन को सख्त हिदायत दी कि ड्यूटी टाइम में सभी यूनीफार्म पहनें ताकि मरीज और तीमारदार पहचान कर सकें। डीएम का ये आदेश 24 घंटे बाद ही हवा हो गया।
मंगलवार को दोपहर 12:30 बजे अस्पताल परिसर में पूर्व की तरह आम लोग वार्ड तक जा रहे थे। यहां मरीज को देखने आए रविप्रकाश से पूछा कि आपको किसी ने वार्ड तक आने में रोका तो उन्होंने सीधा सा जवाब दिया कि एक महिला होमगार्ड ने बस टोका लेकिन मैं तो सीधा चला आया।
वार्ड में मंगलवार को भी स्टाफ रंगीन ड्रेस में थे। चिकित्सक बिना एप्रिन पहने ही ओपीडी में कार्य कर रहे थे। कैमरे ने अपना काम किया लेकिन चिकित्सकों की उदासीनता बरकरार रही।
36 घंटे बाद गठित हुई जांच समिति
मथुरा। सरकारी अस्पताल से नवजात के लापता होने के बाद भी महिला अस्पताल की संवेदनाएं नहीं जागीं। मंगलवार को दोपहर एक बजे अमर उजाला ने सीएमएस डा. बीडी भास्कर से लापरवाही ढूंढने के लिए अस्पताल प्रशासन की जांच के बारे में पूछा तो जवाब आया कि जांच समिति गठित होगी।
साफ है कि घटना के 24 घंटे बाद जांच की खानापूर्ति भी शुरू नहीं हो सकी। शाम को बातचीत में सीएमएस ने बताया तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। इसमें डा. बी लाल, डा. सचिन गुप्ता और डा. सुनीता सागर को रखा गया है।
मरीजों से मिलने के नियम लेकिन पालन नहीं
मथुरा। तीमारदारों के लिए मरीजों से मिलने के नियम-कानून तय हैं। इसके लिए महिला अस्पताल के गेट पर ही साफ शब्दों में लिखा है कि सर्दियों में दोपहर 11 बजे से 12 बजे तक ही मरीजों से मुलाकात होगी। यहां 12 बजकर 45 मिनट पर तीमारदार बेरोक टोक अंदर घुस रहे थे। सुरक्षा के लिए तैनात कर्मी फोन पर बतियाने में व्यस्त थीं।
बिलख रही मां, परिजन
मथुरा। महिला अस्पताल में भर्ती नसरीन पहली बार मां बनी लेकिन तीन दिन बाद ही एक महिला उसके कलेजे को टुकड़े को उठाकर ले गई। इस बात के याद आते ही नसरीन की आंखों से आंसुओं की धारा निकल पड़ती है। परिवारीजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
आम रास्ता बना अस्पताल परिसर
मथुरा। अफसरों की लापरवाही का आलम ये है कि महिला अस्पताल परिसर आम रास्ता बन गया है। यहां महर्षि दयानंद अस्पताल वाला गेट हर समय खुला रहता है, ऐसे में बड़ी संख्या में लोग इस रास्ते से जुबली पार्क तक पहुंचते हैं।
मंगलवार को भी ये गेट खुला था। सीएमएस ने तर्क दिया कि आज मंगल बाजार लगता है, ऐसे में मुख्य गेट बंद कर इसे खोल दिया गया है।
महिला की तलाश में अभियान
मथुरा। जिला महिला अस्पताल से नवजात को लेकर भागी महिला की तलाश में पुलिस जुट गई है। पुलिस ने महिला का स्केच बनवाकर फोटो जारी कर दिए हैं। आसपास की कालोनियों, रेलवे स्टेशन और बस अड्डा खोजबीन कराई जा रही है।
सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि महिला की खोजबीन के लिए जीआरपी की मदद ली जा रही है। अन्य रेलवे स्टेशन और थानों में महिला के स्केच फोटो चस्पा कराए जा रहे हैं। महिला के बारे में जानकारी देने के लिए अधिकारियों के नंबर भी उस पर अंकित हैं।
इसके अलावा जिला महिला अस्पताल के आसपास के मोबाइल टावरों की सीडीआर निकलवाई जा रही है। जिला महिला अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिवारीजनों के मोबाइल की लोकेशन भी ट्रैस कराई जा रही है। एसएसपी डा. राकेश सिंह ने बताया कि मामले में सीओ सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम काम कर रही है।
जिला अस्पताल में हुई थी विशेष बालिका से छेड़छाड़
अस्पताल परिसर में बाहरी लोगों का आवागमन घटनाओं की बड़ी वजह है लेकिन चिकित्सा अधिकारी घटना से सबक नहीं लेते हैं।
इससे पहले महर्षि दयानंद अस्पताल में भर्ती विशेष बालिका से भी छेड़छाड़ की रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना हो चुकी है। इसमें कर्मचारियों का निलंबन और मजिस्ट्रेटी जांच भी हुई। इसके बाद भी अफसरों ने बाहरी लोगों के आवागमन के बारे में आंखें मूंद रखी है।