मौत का नजारा देखने के लिए जुटी भीड़ के बीच खतरनाक ग्लेंडर बीमारी से पीड़ित घोड़ी काजल को चिकित्सकों की टीम ने मौत का इंजेक्शन लगा दिया।
गांव परखम निवासी पप्पू ने पिछले साल बलदेव क्षेत्र से 50 हजार रुपये में यह घोड़ी खरीदी थी। सफेद और कॉफी रंग वाली इस घोड़ी को काजल नाम दिया था।
शादी और खुशियों के मौकों पर नाचने वाली काजल को दिसंबर के पहले सप्ताह में किसी बीमारी ने घेर लिया। इससे उसने खाना-पीना छोड़ दिया। दवाओं से उसे कोई राहत नहीं मिली तो जांच कराई गई।
उसके रक्त का नमूना राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार हरियाणा भेजा गया। 12 दिसंबर के बाद काजल के खून के नमूने एक बार फिर क्रास चेक के लिए 28 दिसंबर को हिसार भेजे गए। दूसरे नमूने में काजल को ग्लेंडर बीमारी से ग्रस्त घोषित कर उसकी मौत का फरमान जारी कर दिया गया।
मंगलवार सुबह से मालिक पप्पू के साथ सुबह 10 बजे काजल ने घर छोड़ दिया। मालिक पप्पू घर से निकला तो उसके साथ ग्रामीणों की भीड़ भी चल पड़ी। गांव से एक किलोमीटर दूर तय किए गए मौत के ठिकाने के पास घोड़ी काजल पहुंची।
मौत का तय समय 11 बजे था, लेकिन इसमें साढ़े तीन घंटे का विलंब हो गया। जेसीबी पहुंचने के बाद घोड़ी को दफनाने के लिए गहरा गड्ढा खोदा गया तब पशु चिकित्सकों ने उसे पांच इंजेक्शन लगाए।
घोड़ी की आधे घंटे में मौत हो गई। फरह पशु अस्पताल के प्रभारी डॉ. एसके गंगवार, डॉ. जनेश्वर और डॉ. राजेश सिंह ने मौत की प्रक्रिया पूरी करने को इंजेक्शन लगाए। डॉक्टर गंगवार ने बताया कि पशु की हालत के बाद दवा की मात्रा तय की जाती है।
दफनाने के ठिकाने का ग्रामीणों ने किया विरोध
फरह। मौत के बाद काजल को दफनाने के लिए चुने गए ठिकाने का कुछ ग्रामीणों ने विरोध किया। गोवर्धन नाले के इस स्थान के बारे में ग्रामीणों का कहना था कि यहां तीन गांवों के पशु चरते हैं, घोड़ी को नहर के पास दफनाया जा सकता था। इस पर पशु चिकित्सकों का कहना था कि स्थान उन्होंने नहीं, पुलिस ने चुना है।
मेलियो माइनस मेलाइजन बीमारी थी
फरह। डॉक्टरों के अनुसार सामान्य तौर पर इस बीमारी को ग्लेंडर के नाम से जानते हैं, लेकिन इसका वैज्ञानिक नाम मेलियो माइनस मेलाइजन है। यह बैक्टीरिया जनित बीमारी होती है। इसमें पशु को नष्ट करना पड़ता है, अन्यथा इसके परिणाम घातक होते हैं।
अभी नहीं मिला 25 हजार का राहत चेक
फरह। काजल के मालिक पप्पू को प्रशासन की ओर से 25 हजार का चेक भी दिया जाना था। इसमें पचास फीसदी राहत केंद्र सरकार और इतना ही राज्य सरकार प्रदान करती है, लेकिन अपरिहार्य कारणों से पप्पू को चेक नहीं मिल सका।
पप्पू का कहना है कि सहायता राशि ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। 20 हजार की दवा वह सोमवार को ही लेकर आया था। वह देशी दवा से उपचार करा रहा था।