- छात्रवृत्ति घोटाले में चपरासी की गिरफ्तारी का मामला
- वर्ष 2005 में हुआ था भर्ती, 2016 में मथुरा में हुआ तबादला
संवाद न्यूज एजेंसी
मथुरा। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कार्यालय में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामप्रसाद की गिरफ्तारी के बाद छात्रवृत्ति घोटाले से जुड़े अन्य कर्मियों में अफरातफरी है। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने निदेशालय को पत्र भेजकर उसकी गिरफ्तारी की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी है। माना जा रहा है कि जल्दी ही निलंबन आदेश जारी कर दिया जाएगा।
मूल रूप से रिवाड़ा, बुलंदशहर निवासी रामप्रसाद 2 मई 2005 को अलीगढ़ में चपरासी/ अर्दली के पद पर विभाग में भर्ती हुआ था। इसके बाद भी उसने कभी पदोन्नति के लिए प्रयास नहीं किया। नौकरी लगने के बाद परिवार के साथ अलीगढ़ के गांधी पार्क थाना क्षेत्र के नदला मानसिंह में रह रहा था। बताया जा रहा है कि हमीरपुर से तबादले के बाद आरोपी ने 23 सितंबर 2016 को मथुरा में जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी कार्यालय में कार्यभार ग्रहण किया था। तब से उसकी तैनाती यहीं थी। वह ड्यूटी करने के लिए रोजाना अलीगढ़ से मथुरा आता था। 31 जुलाई 2024 को उसकी सेवानिवृत्ति होनी है। वह सोमवार को रोजाना की तरह कार्यालय आया था। ड्यूटी पूरी करने के बाद घर जा रहा था। तभी रास्ते में ही आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू), कानपुर की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। टीम उसे अपने साथ ले गई।
अक्सर चुपचाप रहता था
मथुरा कार्यालय में तैनाती के दौरान रामप्रसाद अक्सर चुपचाप रहता था। अपने एक दोस्त को छोड़कर अन्य किसी से ज्यादा बातचीत नहीं करता था। अपने पहनावे और हैट को लेकर वो चर्चा में रहता था। छात्रवृत्ति घोटाले में नाम आने के बाद से अधिकारी और कर्मचारी रामप्रसाद को गोपनीय विभागीय कार्यों से दूर रखते थे। गिरफ्तारी के बाद से आरोपी और उसके परिजनों के मोबाइल फोन स्विच ऑफ हैं।
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कर्मचारी रामप्रसाद की गिरफ्तारी की सूचना निदेशालय को भेज दी गई है। उस पर आगे क्या विभागीय कार्रवाई की जानी है। इसका निर्णय निदेशालय स्तर पर लिया जाना है।
- विजय लक्ष्मी मौर्या, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी