मथुरा। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस में लॉकडाउन के चलते बेटे की डायलेसिस के लिए पिता दर-दर भटक रहा है, पर कोई भी उसकी मदद को आगे नहीं आ रहा है और न प्रशासन ने अभी तक उसकी मदद की है। महीने में चार बार दिल्ली में होने वाली डायलेसिस के लिए आखिर बेटे की जान बचाने को पिता कैसे जाए। पूरे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है।
शहर के लालागंज की सैयद वाली गली निवासी मुईन के 10 साल के बेटे आजम अली की दोनों किडनी खराब हैं। करीब एक साल से दिल्ली के चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय में डायलेसिस चल रही है। पिता के अनुसार 20 मार्च को वह दिल्ली में बेटे की डायलेसिस कराकर आए। हर हफ्ते उनके बेटे की डायलेसिस होती है। लॉकडाउन के चलते वाहन न चलने के कारण वह दिल्ली बेटे की डायलेसिस के लिए नहीं जा पा रहे।
पिछले तीन दिन से प्रशासन से भी गुहार लगाई, पर अभी तक कोई संतोषजनक उत्तर नहीं मिला। उनके बेटे की जान खतरे में बनी हुई है। शहर के दरेसी हास्पिटल, जिला अस्पताल और नयति हॉस्पिटल ने डायलेसिस करने से मना कर दिया। आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण वह अपने बेटे को खो देंगे। उनकी मदद प्रशासन या फिर कोई सामाजिक संस्था करे, जिससे उनके बेटे की जान बचाई जा सके।