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काम्यवन जाये ते काम बन जात है...

Wed, 02 Dec 2015 11:52 PM IST
ब्यूूराे, अमर उजाला
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 बालकृष्ण लाल की विविध बाल लीलाओं का साक्षी वृंदावन करोड़ों लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है। श्रीमान मंदिर बरसाना के नेतृत्व में चल रही श्रीराधारानी ब्रजयात्रा ने काम्यवन के अनेक स्थलों का दर्शन कर पुण्य अर्जित किया।
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विष्णु पुराण के अनुसार 84 कुंड, 84 तीर्थ, 84 मंदिर, 84 खंभे सहित ब्रज के प्रसिद्ध ठाकुर राधागोविंद, राधागोपीनाथ, राधादामोदर, राधामाधव और गोविंद देव ने भी यहां निवास किया था। अज्ञातवास के समय पांडवों का भी यहां निवास रहा है। उनसे संबंधित धर्मकुंड, भीमकुंड, पंचतीर्थी धर्मराज सिंहासन आदि दिव्य स्थल हैं। भागवताचार्य श्रीजी शर्मा ने काम्यवन की अद्भुत कथाएं सुनाईं। उन्होंने बताया कि वृंदा देवी आक्रांताओं के भयावह समय में भी काम्यवन छोड़कर गोविंददेवजी के साथ जयपुर नहीं गईं। प्रभु इच्छा की अवहेलना कर पुष्करजी ब्रज में नहीं आए तो श्रीकृष्ण ने योग माया का स्मरण किया और उसी समय पृथ्वी से जलप्रवाह उमड़ पड़ा।

इसमें से एक कन्या रत्न प्रकटी। उसी के नाम से विमलकुंड विख्यात हुआ। राजा विमल की छह हजार रानियों से उद्धृत कन्याओं का वरण भी श्रीकृष्ण ने किया था। इस कारण भी विमलकुंड नाम पड़ा। इन सब के अतिरिक्त विह्वल कुंड, काम सरोवर, श्रीकुंड, स्खलनि शिला, भोजन थाली, कामेश्वर महादेव आदि स्थलों के दर्शन से यात्री अभिभूत हुए। काम्यवन के बाजार में यात्रा का सैकड़ों ब्रजवासियों ने भव्य स्वागत किया। बाबा ने ब्रज वासियों को संबोधित करते हुए कहा कि ब्रजलीला स्थलियां हमारी धरोहर हैं, इन्हें बचाकर रखना है। अन्यथा हमसे बड़ा अभागा कोई नहीं होगा। गुरुवार को यात्रा बरसाना वापस पहुंचेगी।
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