शहर के आगरा रोड पर कैंट क्षेत्र में स्थित कैंट वाली काली मां को साक्षात दुर्गा शक्ति का अवतार माना जाता है। मंदिर के बारे में मान्यता है कि मथुरा के एक भक्त को स्वप्न में मां ने दर्शन दिए। भक्त के अनुरोध पर मारवाड़ी भगत कालीचरन ने मंदिर का निर्माण कराया।
मंदिर के संरक्षक महेश चतुर्वेदी नौघर वाले और दिनेश चतुर्वेदी नौघर वाले बताते हैं उनके परिवारी कन्हैयालाल चतुर्वेदी को मां ने अपने प्राकट्य का स्वप्न दिया था। स्वप्न में बताए स्थान पर खोदाई कराई तो मां का विग्रह प्रकट हुआ।
1959 में मारवाड़ी भगत कालीचरन ने देवी की सेवा की तो उनकी मनोकामना पूरी हुई। इस पर कालीचरन भगत ने मंदिर का निर्माण कराया और जयपुर से देवी की भव्य प्रतिमा बनवाकर वैदिक रीति से स्थापना कराई। तभी से मंदिर में रोज पूजा अर्चना होती है और हर नवरात्रों में मेला लगाया जाता है और शाम को बंगला झांकी के दर्शन होते हैं।
पांच को पूर्णाहुति, छह को सजेगा फूलबंगला
नवरात्र पूजा के क्रम में कैंट वाली काली देवी के मंदिर पर पांच मार्च को दोपहर 12 बजे पूर्णाहुति और लांगुरा पूजन होगा। कैंट काली मां मित्र मंडल के संस्थापक प्रवीन गोयल के अनुसार छह अप्रैल को मंदिर पर फूल बंगला सजाया जाएगा और छप्पन भोग के दर्शन होंगे।