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मथुरा के विकास पर बातें ज्यादा काम कम हुआ

Mon, 30 Jan 2017 12:00 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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मथुरा में यमुना का हाल
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घोषणाओं के गठरी खोलकर देखेंगे तो लगेगा मथुरा को बहुत कुछ मिला। लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं आ सका है। विश्व पटल पर पहचान रखने वाली मथुरा नगरी विकास के मानचित्र पर हाशिए पर ही है। मथुरा की आत्मा कही जाने वाली यमुना के नाम पर भी खूब सियासत हुई। हर चुनाव में प्रत्याशी यमुना की सफाई के बड़े-बड़े दावे करते हैं लेकिन हकीकत घाटों पर जाने पर दिख जाती है। सड़कें चाहें बाजारों की हो या फिर मोहल्लों की, जर्जर हैं। जरा सी बरसात हो जाए तो तालाब बन जाते हैं शहर के मोहल्ले और कालोनियां।
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द्वारिकापुरी कालोनी से नेशनल हाईवे तक का इलाका देखेंगे तो लगेगा कि किसी पुरानी बस्ती में आ गए हैं। सड़कें टूटी पड़ी हैं। नालियों का पानी बहकर सड़क पर आ गया है। सफाई तो मानो वर्षों से हुई ही नहीं होगी। सड़कों पर इतने गड्ढे हैं कि चल भी नहीं पाएंगे। कृष्णानगर की अंबेडकर कालोनी में जाकर देख लीजिए।

सफाई व्यवस्था चौपट है। नालियों का पानी उफनकर सड़कों पर आ जाता है। ये तस्वीर तो थी मोहल्लों की। अब बाजार को देख लीजिए। गुड़हाई बाजार पुराना मार्केट है। लेकिन सड़कें टूटी हुई हैं। पता नहीं सड़कों में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क है। जरा सी बरसात हो जाए तो तालाब बन जाता है पूरा इलाका। दुकानों तक में पानी घुस जाता है। 
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इन सड़कों पर चलना भी मुश्किल
-पुराने बस स्टैंड से नया नगला तक
-चौक बाजार से घीया मंडी तक
-अशोक विहार से लेकर सदर बाजार तक
-यमुना पार में यमुना ब्रज पैंठ से ईसापुर गांव तक
- वृंदावन में कई सड़कों की हालत खराब है
- मथुरा-वृंदावन मार्ग भी खराब है


यमुना में गिर रहा नालों का पानी
यमुना को साफ करने के दावों और घोषणाओं के बीच आज भी नालों का गंदा पानी गिर रहा है। यमुना का जल दूषित हो गया है। जल जीव भी मरने लगे हैं। प्रदूषण खतरे के निशान को पार कर गया है। ये स्थिति तब है जब हर चुनाव में प्रत्याशी यमुना मैया का पूजन करने के बाद नामांकन कराते हैं। बात यमुना में पानी के जहाज चलाने की हो रही है जबकि धरातल पर प्रदूषण भी दूर नहीं हो पा रहा है। 
  
50 फीसदी लोग खरीद रहे पेयजल
शहर के पचास फीसदी लोग ऐसे हैं जो पानी खरीदकर पीते हैं। आरओ प्लांट से पानी की सप्लाई होती है। शहर में 180 आरओ प्लांट हैं। सुबह को गाड़ियों से घर-घर में पानी की सप्लाई की जाती है। मथुरा में बड़ा कारोबार पानी का ही है। हालांकि नगर पालिका से भी पानी की सप्लाई होती है लेकिन वो पानी ऐसा नहीं है जो पिया जा सके।  
  
कहना इनका
- चंदनवन कालोनी निवासी गौरव शर्मा का कहना है कि टंकी का पानी तो पीने काबिल आता ही नहीं। आरओ का पानी खरीदना पड़ता है। साफ-सफाई की स्थिति भी बेहद खराब है। कभी झाड़ू लग जाती है तो कभी नहीं।
- कृष्णानगर निवासी दुष्यंत त्यागी कहते हैं कि विकास की बात तो होती है लेकिन हकीकत में कुछ नहीं मिलता। जरा सी बरसात हो जाए तब देखिए शहर की हालत।
- द्वारिकापुरी कालोनी निवासी रोहताश गुप्ता का कहना है कि सड़क पर हर वक्त पानी भरा रहता है। निकल भी नहीं सकते। लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया।

चहुंमुखी विकास कराएंगे मथुरा का
भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत शर्मा का कहना है कि अभी तक सियासी दलों ने लोगों को छला है। लेकिन अब मथुरा का विकास होगा। उनकी कोशिश रहेगी कि मथुरा में वो सारी योजनाएं संचालित हों जो मेट्रो सिटी में हैं। सड़कें चकाचक होंगी। पानी की समस्या दूर करेंगे। ट्रैफिक सुधरेगा। जलभराव का संकट दूर किया जाएगा।

हमने विकास कराया है और कराएंगे
कांग्रेस प्रत्याशी प्रदीप माथुर का कहना है कि हमने जो विकास कराया है वो एक रिकार्ड है। जो काम रह गए हैं उन्हें भी पूरा कराया जाएगा। उनकी कोशिश रहेगी कि शहर मेट्रो सिटी जैसा बन जाए। बिजली की किल्लत को दूर किया जाएगा।
 
हर समस्या का समाधान होगा
रालोद प्रत्याशी डा. अशोक अग्रवाल का कहना है कि वो पहले से ही मथुरा में विकास कराते रहे हैं। उन्होंने हर किसी की मदद की। आगे भी वो मदद करते रहेंगे। उनका प्रयास रहेगा कि शहर के हर मोहल्ले और कालोनी को बेहतर बना सकें।

मूलभूत सुविधाएं दिलवाएंगे
बसपा प्रत्याशी योगेश द्विवेदी का कहना है कि सब जानते हैं कि बसपा के शासनकाल में विकास होता है। कानून व्यवस्था सुधरती है। उनका प्रयास होगा कि वो मथुरा शहर को और सुंदर बना सकें। जलभराव की समस्या से निजात दिला सकें। बिजली संकट दूर होगा।
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