शहीद के शव का अंतिम संस्कार तीन घंटे देरी से हुआ। परिवारीजनों की पांच मांगों पर सहमति बनने पर ही अंतिम संस्कार किया गया। इस बीच मौके पर माहौल गरमाया रहा।
शहीद बबलू सिंह का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह 6:30 बजे उनके पैतृक गांव झंडीपुर स्थित घर पर लाया गया।
यहां से शहीद की अंतिम यात्रा अंतिम संस्कार स्थल के लिए चली। 7:45 बजे शहीद को अंतिम विदाई देनी थी, लेकिन इसी बीच परिजनों ने अपनी मांगें रखीं तो माहौल गर्माने लगा। परिजनों के साथ एकत्रित हजारों ग्रामीणों ने मांगों पर सहमति जताते हुए हंगामा शुरू कर दिया। मांगें पूरी किए जाने के बाद ही अंतिम संस्कार करने तक का एलान कर डाला। इस बीच एसपी सिटी और एडीएम प्रशासन ने 20 लाख रुपये का चेक शहीद के परिजनों को दिया लेकिन उन्होंने लेने से इनकार कर दिया। इस दौरान प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी हुई।
इस खबर पर डीएम निखिल चंद शुक्ला, एसएसपी बबलू कुमार और एसडीएम चांदनी सिंह गांव में पहुंचे। परिवार वालों से बात की गई। लेकिन परिवार वाले अपनी मांगों पर अड़े रहे।
पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अनूप सिंह और विधायक पूरन प्रकाश ने शहीद के परिजनों को समझाया तो वो अंतिम संस्कार करने के लिए माने। पूर्वाह्न 11 बजे शहीद का अंतिम संस्कार हो सका।
प्रशासन ने सौंपा 20 लाख का चेक
शहीद बबलू सिंह का अंतिम संस्कार होने से पहले प्रशासन ने शहीद के परिजनों को 20 लाख रुपये का चेक सौंपा। डीएम निखिलचंद्र शुक्ला ने बताया कि परिजनों की ओर से दिए गए मांग पत्र में दी गईं सभी मांगें शासन स्तर से जुड़ी हैं, इसलिए मांग पत्र को तत्काल शासन को भेज दिया गया है।
विधायक निधि से बनेगा शहीद द्वार
विधायक निधि से शहीद बबलू सिंह की याद में ग्राम झंडीपुर में शहीद द्वार बनाया जाएगा। ऐसा आश्वासन विधायक पूरन प्रकाश ने दिया।
ये हैं पांच मांगें
-शहीद के भाई सतीश को सरकारी नौकरी
-शहीद एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के बराबर सरकारी मदद
-शहीद की पत्नी रविता को पेट्रोल पंप
-शहीद का स्मारक बने
-कृषि भूमि का शहीद की पत्नी को पट्टा
- बच्चों की पढ़ाई निशुल्क कराई जाए