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उमंग, उल्लास के उत्सव का आगाज

Sun, 25 Sep 2016 11:55 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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दीनदयाल धाम में हवन
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प्रभात की बेला, ढोल की थाप, नगाड़ों की गड़गड़ाहट और हर ओर उल्लास। फरह के गांव-गांव से सिरों पर कलश रख निकलती महिलाओं की टोली। ये अनुपम नजारा रविवार सुबह दीनदयालधाम में दिखा। भव्य कलश शोभायात्रा के साथ एकात्म मानववाद के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय के  100वें जन्मदिवस समारोह पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती महोत्सव-2016 का आगाज हो गया। समारोह पांच दिन तक चलेगा।
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दीनदयाल धाम में रविवार की सुबह कुछ अलग रही। उमंग और उल्लास के बीच चारों ओर से महिलाएं सजधज कर धाम की ओर जा रही थीं। सभी के सिर पर मंगल कलश रखे थे। स्मारक भवन में मातृ मंडल सेवा भारती की बहनें गर्मजोशी के साथ जन्मभूमि निदेशक पद्मजी और संयोजिका रीना सिंह के नेतृत्व में उनके स्वागत में खड़ी थीं। दीनदयालधाम में जगह-जगह कलश शोभायात्रा का पुष्प बरसा कर स्वागत किया गया। शोभायात्रा धाम की परिक्रमा पूरी करने के बाद मंदिर परिसर में संपन्न हुई। 

कलश यात्रा प्रतियोगिता अध्यक्ष डॉ. निर्मला सिंह ने बताया कि मंगल कलश यात्रा प्रतियोगिता में गांव शाहपुर, मखदूम, दौलतपुर, फतिहा, नगलावर, दीनदयालधाम, फरह, पींगरी की 351 महिलाओं ने भाग लिया। शोभायात्रा के समापन पर महिलाओं का सम्मानित किया गया।
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प्रतियोगिता की विजेता
प्रतियोगिता निर्णायक मंडल डॉ. मंजू गुप्ता, शारदा सिंह चौहान, पायल सिंह, अनीता दुबे, डॉ. मालती मिश्रा, कमलेश चौहान ने कलश सज्जा के आधार पर प्रतियोगिता के विजेता घोषित किए। पींगरी की सीमा, नगलावर की शारदा, फरह की लक्ष्मी, शाहपुर की ऋतु, दीनदयालधाम की मोहिनी और पूजा पाठक, फतिहा की राखी, दौलतपुर की सोनिया निरंकारी, नगला चन्द्रभान की बबीता विजयी रहीं। आगरा की पूर्व महापौर अंजुला सिंह माहौर, राकेश कुमारी चौहान, डॉ. निर्मला सिंह, पायल सिंह चौहान, पूनम चौहान, राखी गुप्ता, शारदा सिंह ने विजेता महिलाओं को स्मृति चिह्न और पुरस्कार देकर सम्मानित किया।


आंखों में बस गई ‘दीना’ के घर की रंगोली
पंडित दीनदयाल उपाध्याय जन्मशती महोत्सव-2016 में रविवार को प्रदर्शनी स्थल पर रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। कनिष्ठ एवं वरिष्ठ वर्ग में 128 बालिकाओं ने भाग लिया। अध्यक्षता बीना चौहान ने की। 

कनिष्ठ वर्ग (14 वर्ष तक) में पंडित दीनदयाल उपाध्याय (नगला चंद्रभान वासियों के दीना) के घर की रंगोली मुख्य आकर्षण रही। इसके अलावा वर्ग में कमल का फूल, किशन का स्वरूप, पेड़ मत करो नष्ट सांस लेने में होगा कष्ट... मुख्य रंगोली रहीं। वरिष्ठ वर्ग में भारत माता का चित्र, ध्वज, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत मिशन, शिशु को स्तनपान कराती माता, मुझे मत काटो... रंगोलियां प्रमुख रही।

बालिकाएं इस दौरान रंगीन चावल, दाल, पुष्प, लकड़ी का बुरादा, सेलम का बुरादा और सज्जा के सामान से अपनी-अपनी रंगोलियों को सजाती नजर आईं। कनिष्ठ वर्ग में 60 बालिकाओं ने भाग लिया, तो वरिष्ठ वर्ग में 68 बालिकाओं ने भाग लिया।

प्रतियोगिता में निर्णायक मंडल की भूमिका डॉ. मंजू गुप्ता, शारदा सिंह चौहान, पायल सिंह चौहान, अनीता दुबे, डॉ. मालती मिश्र, कमलेश चौहान, साक्षी सिंह ने निभाई। संयोजिका रीना सिंह ने बताया कि प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा लोकगीत प्रतियोगिता के दिन 29 सितंबर को की जाएगी। इस दौरान सुषमा अग्रवाल, सीमा सारस्वत, तेजस्वनी शर्मा, दीपमाला, रूबी शाक्य आदि उपस्थित थीं। 

हवन में दीं आहुतियां
दीनदयालधाम में सुबह साढ़े आठ बजे हवन किया गया। आचार्य विपिन बिहारी शर्मा व गणेश ने पूजा अर्चना कराई। स्मारक समिति के संरक्षक पद्मजी, महामंत्री कमल कौशिक, अशोक टैंटीवाल, जगमोहन पाठक, ज्ञानेश शर्मा, नरेन्द्र सिंघल, सालिगराम बटिया, नवीन मित्तल, प्रेमचंद शर्मा आदि ने आहुतियां दीं।
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