कंस के कारागार (श्रीकृष्ण जन्मस्थान स्थित गर्भगृह) में इस बार श्रीकृष्ण ‘धवल चांदनी’ के बीच जन्म लेंगे। विद्युत सजावट इस प्रकार की जा रही है कि लोगों को गर्भगृह में चांदनी का अहसास होगा। चंद्रवंशी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के लिए गर्भगृह को पुष्पों से चंद्राकार बनाया जा रहा है। शृंगार के लिए कोलकाता और थाईलैंड से पुष्प मंगाए गए हैं।
श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर ब्रजभूमि में उल्लास छाने लगा है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर जन्मोत्सव के दर्शन की अलग ही महिमा है। भक्तों की इन्हीं भावनाओं के दरम्यान चल रही तैयारियां भक्ति के अद्भुत आनंद की अनुभूति करा रही हैं। भक्ति के इस रस को जन्माष्टमी के दिन और भी आनंदमयी बनाने के लिए गर्भगृह (कंस के कारागार) को पुष्पों से चंद्राकार स्वरूप दिया गया है।
पुष्पों के बीच विद्युत सजावट कुछ इस प्रकार की गई है कि चंद्रवंशी कृष्ण के जन्मोत्सव के दौरान चंद्रमा की धवल चांदनी का अहसास भक्तों को होगा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा का कहना है कि यहां गर्भगृह में जन्मोत्सव का विशेष स्थान है। इसी स्थान पर भगवान कृष्ण का देवकी और वासुदेव के बंदी रहते जन्म हुआ था।