बलदेव में दाऊजी महाराज के हिंडोले। फाइल फोटो
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बलदेव (मथुरा)। दाऊजी मंदिर में हिंडोला महोत्सव की अनूठी परंपरा है। दाऊजी महाराज की विशाल प्रतिमा को किसी हिंडोले में झुलाना संभव नहीं है। इसलिए उनके सम्मुख हिंडोला में दाऊजी महाराज का मुकुट एवं बांसुरी के साथ शीशा रखा जाता है। सीसे में उनका प्रतिबिंब झूलता है।
हिंडोला महोत्सव में समाज गायन भी होता है। समाज गायन में राधे झूलन पधारो झुक आए बदरा, झुक आए बदरा, घिर आए बदरा, हिंडोरे माई झूलत हैं ब्रजराज, मल्लकाछ अरु शीश टिपारा गोप सखा लीये साथ...आदि पदों के साथ मुकुट, बांसुरी के साथ स्वर्ण जड़ित दर्पण में उनके प्रतिबिंब को रेशम की डोरी से धीरे-धीरे झोटा देकर झुलाया जाता है। यहां हिंडोला दर्शन एकादशी से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक चलेगा।
कल्याण देव जी के वंशज पांडेय समाज के युवक बालक रेशम की डोरी से झोटा देकर उनको झूला झूलाते हैं। रिसीवर आरके पांडेय व ज्ञानेंद्र पांडेय ने बताया कि वर्तमान में कोरोना के चलते तीन अगस्त तक मंदिर बंद होने के कारण मंदिर सेवायत ही प्रतिदिन झूला झुला रहे हैं।