पीड़िता के अनुसार, 15 जनवरी को उसके मोबाइल फोन पर एक अनजान कॉल आई। कॉल करने वाले ने अपना नाम मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन से विजय खन्ना बताया। इसके साथ ही कहा कि नरेश गोयल के साथ मिलकर मनी लॉन्ड्रिंग की है। इसके बाद सीबीआई अफसर बनकर एक शख्स ने बात की।
उसने कहा कि मामले को रफा-दफा करने के लिए सुबह भारत के मुख्य न्यायाधीश से बात कराएंगे। अगले दिन फोन आया और किसी व्यक्ति से बात कराई। उसने बताया कि धोखाधड़ी के मामले में वारंट जारी हुआ है। गिरफ्तारी से बचने के लिए 28 लाख रुपये मांगे।
पीड़िता के अनुसार, वह इतनी घबरा गईं कि ठगों के बताए नंबर पर रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद उन्होंने अपने परिजन को बात बताई तो उन्होंने बताया कि उनके साथ साइबर ठगी हो गई है। पीड़िता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने गईं, लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई।
एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय के आदेश पर साइबर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। साइबर थाना प्रभारी जयवीर सिंह ने बताया कि मामले की विवेचना चल रही है। जिस खाते में रुपये ट्रांसफर हुए थे वह खाता बंद हो गया है। साइबर की टीम खाता धारक का पता लगाने की कोशिश कर रही है।