मथुरा। मसानी चौक स्थित वेदमंदिर में आचार्य प्रेमभिक्षु की 25वीं पुण्यतिथि प्रेरणा दिवस के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर वेदमंदिर अधिष्ठाता आचार्य स्वदेश महाराज ने कहा कि स्वर्गीय आचार्य श्री के भौतिक शरीर को विदा हुए 25 वर्ष हो गए परंतु उनका सौम्या व्यक्तित्व व प्रेरणादायी शिक्षाएं कभी हमसे ओझल नहीं हुईं।
आचार्य प्रेमभिक्षु बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी रहे। उनकी विद्वता, लेखन शक्ति, सर्जनात्मकता, सिद्धांत निष्ठा व समर्पण उच्च कोटि का था। वे सच्चे अर्थों में महात्मा थे व बड़ी सादगी से जीवन व्यतीत करते थे। उन्होंने आर्यसमाज को गांवों तक पहुंचाने का बड़ा ही उत्तम कार्य किया। अल्प समय में ही मथुरा जनपद के 50 लगभग गांवों में आर्यसमाज की स्थापना की थी।
इधर, संस्कार जागृति मिशन द्वारा आर्य समाज के विद्वान व वेदमंदिर मथुरा के संस्थापक आचार्य प्रेमभिक्षु की 25वीं पुण्यतिथि मनाई गई। मिशन की संरक्षक आचार्य सत्यप्रिय आर्य ने कहा कि आचार्य प्रेमभिक्षु ने जीवनभर आर्यसमाज के सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया और गांवों में घूम-घूमकर मानव समाज को जागृत करने का अथक प्रयास किया।
अध्यक्ष डॉ. अर्चना प्रिय आर्य ने कहा कि स्वर्गीय आचार्य महर्षि दयानंद के कट्टर अनुयायी थे। उन्होंने वैदिक धर्म के उत्थान के लिए सब कुछ सहा। अनेक संकटों के बावजूद ऋषि कार्य में लगे रहे। इस दौरान सचिव विवेक प्रिय आर्य, दीपक सारस्वत, कपिल प्रताप सिंह आदि ने श्रद्धांजलि अर्पित की।