मोहिनी के रूप में चांदी की पालकी में सवार भगवान रंगनाथ
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वृंदावन (मथुरा)। दिव्य देश रंगनाथ मंदिर में ब्रह्मोत्सव के पांचवें दिन पालकी में भगवान रंगनाथ विराजे। चांदी की पालकी में विराजमान भगवान रंगनाथ ने मोहिनी रूप में दर्शन दिए। उनके हाथ में अमृत कलश लगे थे।
चैत्र माह कृष्ण पक्ष षष्टी को यह पालकी की सवारी निकलती है। भक्तों के कंधों पर विराजमान भगवान रंगनाथ मंदिर से निकलकर रंगलक्ष्मी आदर्श संस्कृत आदर्श महाविद्यालय बगीची बड़ा खटला छोटा खटला, बगीचा, वेंकटेश मंदिर, रामानुज कोट ठाकुर चतुर्भुज लक्ष्मी नारायण मंदिर होते हुए मंदिर स्थित सत्संग भवन पहुंची। संप्रदाय के स्थानों, बगीचों में इस दिन प्रभु का पूजन अर्चन, अमृत वितरण आदि मनोरथ होते हुए पालकी अपराह्न में मंदिर पहुंची। सायंकाल बेला में भगवान की सवारी स्वर्ण निर्मित सिंह शार्दूल पर निकली।
कहते हैं इस प्रकार का जीव प्रकृति में सतयुग में होता था। पक्षियों की भांति आकाश में विचरण करने वाले उस काल के इन विचित्र सिंह शार्दूल की परिकल्पना यहां देखी जा सकती है। सिंह का सा मुख, हाथी जैसी सूंड एवं विशालतम शरीर पर मजबूत पंखों के सहारे यह हाथी के बच्चे को भी ले आते थे। ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत इस सवारी के दिन भी सिंह शार्दूल की परिकल्पना अनुसार एक हाथी का बच्चा उसकी सूंड में लटका देखा जा सकता है। भगवान की सवारी का यह अनूठा दृश्य श्रद्धालुओं को रोमांचित कर देने वाला है।
कोरोना के चलते नहीं खेली जाएगी पानी के रंगों की होली
उत्तर भारत के विशालतम रंगनाथ मंदिर में चल रहे ब्रह्मोत्सव के अंतर्गत छठवें दिन होने वाली होली की सवारी में इस बार गुलाल और फूलों की होली होगी पानी के रंगों का प्रयोग नहीं किया जाएगा। मंदिर की मुख्य अधिशासी अधिकारी अनघा श्री निवासन ने बताया कि दुनिया भर में फैल रहे कोरोना वायरस के कारण मंदिर प्रबंधतंत्र ने निर्णय लिया है कि वर्षों से गीले रंगों से चली आ रही होली की सवारी में इस बार केवल गुलाल और फूलों का प्रयोग किया जाएगा।