युवक की हत्या में शामिल उसकी पत्नी और उसके प्रेमी सहित तीन लोगों को अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इस मामले में दंपति के 11 साल के बेटे की गवाही भी अहम साबित हुई। पुलिस ने इस केस का खुलासा भी दंपति के बेटे द्वारा दी गई जानकारी पर तफ्तीश करके किया था।
रिश्तों के कत्ल की यह सनसनीखेज वारदात 25 अगस्त 2014 की है। हाईवे थाना क्षेत्र में महेंद्र नगर निवासी वीरू (32) की जुनसुटी के पास चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। सिर पर लोहे की रॉड से भी वार किए गए थे।
पुलिस ने इस घटना की तफ्तीश वीरू के घर से ही शुरू की। वीरू के 11 साल के बेटे आकाश से भी पुलिस ने कुछ जानकारी जुटाई। आकाश ने पुलिस को बताया कि उसकी मां सरस्वती घंटों फोन पर बातें करती हैं। पुलिस ने सरस्वती के फोन नंबर की कॉल डिटेल निकलवाई और इन्हीं नंबरों के आधार पर पुलिस ने हाईवे थाना क्षेत्र के गांव पंडूपुर निवासी टेंपो चालक करन सिंह को हिरासत में ले लिया। पुलिस की कड़ाई से करन सिंह ने वारदात का खुलासा कर दिया।
उसने बताया कि उसने वीरू को चाकू से गोदकर और रॉड से प्रहार कर मारा है। इस घटना में उसके साथ नगला सीता निवासी उसका साथी भीमा भी था। करन सिंह ने पुलिस को बताया था कि वीरू की हत्या का षड्यंत्र सरस्वती ने ही रचा था। पुलिस ने करन सिंह, सरस्वती और भीमा को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था।
अपर सत्र न्यायालय नवम विवेकानंद शरण त्रिपाठी की अदालत में यह मुकदमा चला। सहायक शासकीय अधिवक्ता रविंद्र कुमार ने बताया कि इस मामले में दोष सिद्ध होने पर पत्नी सरस्वती, करन और भीमा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।
न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं और पुलिस की सर्विलांस टीम के साथ क्राइम सीन का भी निरीक्षण किया था।