मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर के बेटे तरुण का अपहरण उसके ममेरे भाई ने किया था। उसने एक लाख रुपये के एवज में कुम्हेर के एक गैंग को उसे सौंप दिया था। लेकिन गैंग ने फिरौती की रकम के लिए उसे ही फोन करने के लिए कहा। उसने भरतपुर से नई सिम खरीदी और फिरौती के लिए फोन किया। पुलिस कॉल डिटेल के आधार पर अपहर्ताओं के पास पहुंच गई और तरुण को मुक्त करा लिया।
हाईवे थाना क्षेत्र की चंदनवन कालोनी से 13 जून को मर्चेंट नेवी में चीफ इंजीनियर किशन सिंह का बेटा तरुण (14) लापता हो गया था। परिवारीजनों के अनुसार उनको पता चला था कि तरुण को उसके मामा का लड़का नगला जीवना कुम्हेर, भरतपुर निवासी जसमत मोटरसाइकिल पर बैठाकर ले गया है। जब काफी देर बाद भी तरुण वापस नहीं आया तो परिवार वालों ने जसमत के मोबाइल पर कॉल की लेकिन उसका मोबाइल बंद जा रहा था। जब कहीं कुछ पता नहीं चला तो अनहोनी की आशंका में पुलिस को सूचना दी गई। तरुण के भाई विशाल की ओर से थाना हाईवे में रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
16 जून को परिवारीजनों के पास तरुण को छोड़ने के एवज में 60 लाख की फिरौती देने का फोन आया। परिवारीजनों के अनुसार फोन करने वाला जसमत ही था। हालांकि वह आवाज बदलकर फोन कर रहा था लेकिन उन्होंने पहचान लिया था। जिसके बाद पुलिस ने जसमत के पुराने मोबाइल नंबर और फिरौती के लिए जिस नंबर से फोन आया था, उसकी कॉल डिटेल निकलवाई गई। कॉल डिटेल के आधार पर सीओ रिफाइनरी के नेतृत्व में हाईवे पुलिस की टीम करौली जनपद के काली डांगन गांव में पहुंची। यहां से जसमत और उसके दोस्त जगवीर को पकड़ लिया गया। पुलिस के अनुसार उनसे पूछताछ के आधार पर गांव के पास ही स्थित जंगल में दबिश दी गई। पुलिस को देखकर बदमाश भाग गए और तरुण को मुक्त करा लिया गया।
यूं किया गया था अगवा
जसमत से 13 जून के पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा पुलिस ने पूछा। बताया गया कि तरुण को जसमत चिकन लाने का लालच देकर साथ ले गया था। महोली रोड पर जसमत का दोस्त जगवीर निवासी कंचनपुर इंडिका कार लेकर खड़ा था। यहां जसमत ने अपनी बाइक छोड़ी और सभी कार में बैठ गए। वह दो घंटे तक कार में इधर-उधर घूमते रहे। पहले से तय योजना के अनुसार सत्यवीर उर्फ धमाश निवासी कंचनपुर, कैलाश निवासी जगतपुरा जयपुर और नैपाली उर्फ लक्ष्मीचंद निवासी कंचनपुर पहुंचे। तरुण को उन लोगों को सौंप दिया गया। तीनों तरुण को लेकर राजस्थान के करौली के काली डांगन गांव के जंगल में ले गए। बाद में जसमत और जगवीर भी वहां पहुंच गए थे।
पिता ने भी दिए 21 हजार रुपये
एसपी सिटी आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि मामले में सत्यवीर उर्फ धमाश, नैपाली और अन्य बदमाश फरार हो गए। एसपी सिटी ने पुलिस टीम को पांच हजार इनाम दिया है। तरुण के पिता किशन सिंह ने भी पुलिस टीम को 21 हजार रुपये दिए हैं।
फिरौती की रकम मांगने को खरीदी थीं दो सिम
एसपी सिटी आलोक प्रियदर्शी ने बताया कि जसमत और जगवीर ने सत्यवीर उर्फ धमास को डेढ़ लाख रुपये में पकड़ बेची थी। बाद में फिरौती की रकम वसूलने के लिए उसने दो नई सिम भरतपुर से खरीदीं। इन सिम से ही उसने नाम बदलकर किशन सिंह को 60 लाख रुपये देने के लिए फोन किया। इसके कुछ घंटे बाद ही दूसरे नंबर से फोन किया।