चिट फंड एवं कंस्ट्रक्शन कंपनी कल्पतरु ग्रुप में निवेश किए गए रुपये वापस नहीं मिलने से परेशान एजेंट ने कंपनी के मुख्यालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। आरोप है कि एजेंट को कंपनी की ओर से पैसा देने के लिए एक साल से तारीख पर तारीख दी जा रही थी। पुलिस को मौके से सुइसाइड नोट भी मिला है।
फरह के यमुना किनारे की ओर गांव चुरमुरा में कल्पतरु इन्वेस्टमेंट कंपनी और कल्पतरु बिल्डटेक कंपनी लिमिटेड (कल्पतरु बिल्डटेक कंपनी लिमिटेड) का ये मुख्यालय है। बताया गया कि मृतक अभय सिंह (50) निवासी रेवाड़ी (हरियाणा) के थाना रोड़ाई के गांव कराबरा अपने भाई राकेश, निवेशक पूरन चंद्र, विजय सिंह, ओंकार सिंह के साथ 16 मार्च को मुख्यालय में भुगतान के संबंध में आया था और तबसे यहीं था।
सभी लोग कल्पतरु मुख्यालय की दो मंजिली इमारत में नीचे की मंजिल के बने कमरे में सोये थे। भाई राकेश और पूरन चंद्र ने बताया कि रविवार सुबह छह बजे जागने पर उनको अभय सिंह के आत्महत्या करने की जानकारी हुई। उन्होंने मुख्यालय में मौजूद कर्मचारियों को सूचना दी। पुलिस पहुंची।
कमरे में पंखे के लिए लगे कुंदे पर लोहे के तार के टुकड़े से अभय का शव लटका हुआ था। पुलिस ने शव को उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अभय के कपड़ों में से सुइसाइड नोट बरामद किया गया।
दोपहर को अभय सिंह के अन्य परिवारीजन भी फरह पहुंच गए। भाई राकेश के अनुसार अभय ने कल्पतरु ग्रुप में कई लोगों का रुपया निवेश कराया था। कल्पतरु ग्रुप के एफडी और आरडी के खातों में यह रकम जमा कराई गई।
अब कंपनी पैसे नहीं दे रही थी। एक साल से भुगतान के लिए अभय को चक्कर लगवाए जा रहे थे। 16 मार्च को भी अभय को भुगतान के सिलसिले में ही बुलाया गया था। उन्होंने पुलिस को कल्पतरु ग्रुप के मालिक के खिलाफ तहरीर दी।
‘रिश्तेदार, दोस्तों की पांच करोड़ किए थे निवेश’
पोस्टमार्टम गृह पर अभय सिंह के भाई राकेश ने एक बार फिर कल्पतरु ग्रुप पर निवेश किए रुपये वापस नहीं करने और इसके चलते ही अभय के आत्महत्या करने का आरोप लगाया। राकेश के अनुसार उनक ा भाई 2010 में कल्पतरु ग्रुप से जुड़ा था।
उसने रिश्तेदारों, दोस्तों, गांव के लोगाेें से पांच करोड़ रुपये से अधिक निवेश कराए। वह कहता था कि कंपनी साढ़े पांच साल में रुपयों को दो गुना करके देगी। निवेश की गई तीन करोड़ से अधिक की राशि के लिए साढ़े पांच साल की ये अवधि छह महीने से एक साल पूर्व ही पूरी हो चुकी थी। जिन लोगों ने पैसा लगाया था वे पैसा मांग रहे थे।
कंपनी के मालिक ने तीन-तीन लाख रुपये के 10 चेक अभय सिंह को दिए लेकिन वे बाउंस हो गए। तब कंपनी मालिक से अभय सिंह का विवाद भी हुआ था। इस पर कंपनी मालिक ने 16 मार्च को पूरा पैसा देने की कहकर अभय सिंह को बुलाया था।
सुइसाइड नोट से पेज कर दिए गायब
अभय सिंह के भाई राकेश ने बताया कि थाना पुलिस ने तीन पेज का सुइसाइड नोट दिखाया। ये सुइसाइड नोट डायरी के पेजों पर है। लेकिन इसमें 22 से 30 तक की क्रम संख्या में केवल तीन पेज हैं। बाकी के पांच पेज नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन पांच पेज में कल्पतरु ग्रुप के मालिक द्वारा पैसे न दिए जाने संबंधी और अन्य बातें लिखी गई हैं। पुलिस कंपनी मालिक का बचाव कर रही है और सुइसाइड नोट के ये पेज गायब कर दिए गए हैं।
शव थाने में रखा, तब लिखी रिपोर्ट
प्रकरण में रविवार की दोपहर दो बजे परिवारीजनों ने तहरीर दी। शाम चार बजे पुलिस ने परिवारीजनों को सहमत कर पोस्टमार्टम करा दिया और उनसे शव ले जाने के लिए कहा। परिवारीजन पोस्टमार्टम हाउस से अभय का शव लेकर फरह थाने पहुंच गए और प्रदर्शन करने लगे।
आधे घंटे हंगामे के बाद फरह पुलिस ने अधिकारियों से वार्ता की और रिपोर्ट दर्ज की। तहरीर में दी गई भाषा के अनुसार ‘कल्पतरु के मालिक’ के खिलाफ ये रिपोर्ट लिखी गई है, उनका नाम नहीं दिया गया है।
फरह थाना क्षेत्र के चुरमुरा में कल्पतरु की इमारत में एक व्यक्ति द्वारा फांसी लगाए जाने की सूचना मिली थी। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। पीड़ित परिवारीजनों की तहरीर के आधार पर कल्पतरु के मालिक के खिलाफ फरह थाने में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
-मुकुल द्विवेदी, एसपी सिटी
यह फोन पहुंच से बाहर है...
प्रकरण में कल्पतरु ग्रुप से जुड़े जिम्मेदार लोगों से बात संभव नहीं हो पाई। ग्रप के चंदनवन निवासी मालिक के भी मोबाइल नंबर स्विच ऑफ और नॉट रीचेबल जाते रहे। मैनेजर रतन सिंह के मोबाइल पर काल के जवाब में यह फोन पहुंच से बाहर है...जाता रहा।
‘बेटे को लिखा, कोई पैसा मांगने आए तो लड़ना नहीं’
मृतक अभय सिंह के सुइसाइड नोट में बेटे पवन को संबोधित किया गया है कि वह लोगों से पैसे निवेश में लगाने के बाद चुकता नहीं कर सका। इसकी वजह से शर्मिंदा है और समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं रहा। अब छोटी बहन की जिम्मेदारी तुम्हारे कंधों पर है। उसे निभाना और किसी तरह से चाची को संभाल लेना।
साथ ही मेरे जाने के बाद जिन लोगों का पैसा निवेश में लगाया था उनसे विनम्रता से पेश आना। किसी से लड़ाई नहीं करना। संभव हो सके तो जिन लोगों का पैसा दिया जा सके उन्हें मूल पैसा वापस कर देना। इसके लिए चाहे कुछ जमीन व अन्य संपत्ति बेचनी पड़ जाए।