जिले में दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे किनारे स्थित करोड़ों की जमीन को दूरदराज दर्शाकर उपनिबंधक कार्यालय स्तर से लाखों रुपये की स्टांप चोरी की जा रही है। छाता तहसील में तीन बडे़ मामलों में 38 लाख से ज्यादा की स्टांप चोरी पकड़ में आई है। एडीएम वित्त रवींद्र कुमार ने इसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी है।
इस वर्ष फरवरी माह में छाता तहसील के हाईवे किनारे के गांव अकबरपुर में 2800 वर्ग मीटर जमीन की बिक्री 4200 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से दर्शाई गई। 1.17 करोड़ की इस संपत्ति में 8.32 लाख रुपये के स्टांप लगाए गए।
एडीएम वित्त रवींद्र कुमार को हाल ही में किए गए स्थलीय सर्वे से पता चला कि यह जमीन हाईवे किनारे स्थिति है, यहां की जमीन की कीमत 8500 रुपये प्रति वर्गमीटर दर्ज है। इसके मुताबिक इस जमीन की कीमत 2.38 करोड़ होती है, इस पर 16.66 लाख रुपये के स्टांप लगने चाहिए थे। 8.24 लाख रुपये के स्टांप की चपत लगा दी गई।
इसी तहसील के हाईवे किनारे के गांव सैमरी में 4050 वर्ग मीटर जमीन का मूल्यांकन 2400 रुपये प्रति वर्ग मीटर पर 30 प्रतिशत की छूट के साथ 1680 रुपये वर्ग मीटर कर दिया। इसके तहत 68.05 लाख रुपये की जमीन पर 4.76 लाख रुपये के स्टांप लगाए गए। सर्वे से खुलासा हुआ कि यह जमीन भी हाईवे किनारे की है, इसके मुताबिक 16 लाख रुपये के स्टांप लगने चाहिए थे।
इसी गांव में ऐसे ही 4235 वर्ग मीटर आवासीय जमीन पर भी 15.11 लाख रुपये की स्टांप चोरी की गई है। मथुरा तहसील के मोतीझील वृंदावन में दानपत्र में भी 3.11 लाख रुपये की स्टांप चोरी की गई है। एडीएम वित्त ने स्थलीय सर्वे के बाद इनकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी है।