करीब 18 साल से शहर के बीच श्रीकृष्ण जन्मस्थान के निकट अवैध रूप से चल रहा बूचड़खाना आखिरकार बुधवार को बंद हो गया। इसी क्षेत्र में मांस की 18 दुकानों को भी सील किया गया है। मुर्गा फाटक पर पांच दुकान ढहाई गई। पुलिस प्रशासन की इस कार्रवाई से मांस का अवैध कारोबार करने वालों में खलबली मच गई है।
बुधवार को कमिश्नर और डीआईजी के आगरा लौटते ही प्रशासनिक अफसर पुलिस बल के साथ दरेसी रोड पहुंचे। इस क्षेत्र में 18 दुकानों को सील किया गया। इन दुकानों पर पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अफसरों को देखते ही भगदड़ मच गई। लोग दुकानों को छोड़कर भाग खडे़ हुए। पालिका ने सभी दुकानों को सील कर दिया है।
एडीएम रवींद्र कुमार, सिटी मजिस्ट्रेट रामअरज यादव, एसपी सिटी अशोक कुमार और सीओ सिटी जगदीश सिंह ने इसके बाद मनोहरपुरा में 18 साल पहले हाईकोर्ट के आदेश पर सील किए गए बूचड़खाने पर छापा मारा। यहां मांस बिखरा मिला। पुलिस को देख लोगों में भगदड़ मच गई।
यहां कटान के लिए लाए जाने वाले पशुओं के बने स्थल पर तोड़फोड़ की गई। मौके पर मिले मांस की जांच के लिए सेंपलिंग की गई। बाद में मुर्गा फाटक पर बनी मांस की पांच दुकानाें को ध्वस्त कराया गया। अवैध मांस बिक्री की यह संपूर्ण कार्रवाई करीब दो घंटे तक चली। इस मामले में पालिका के ईओ डा.ब्रजेश कुमार ने थाना कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई है।
सरकार बदलते ही बदल गया नजरिया
18 साल तक शहर कोतवाली, थाना गोविंदनगर और डीगगेट चौकी पुलिस जिस अवैध बूचड़खाने का संचालन में अपना लाभ देखती थी, अब सूबे की सरकार बदलते ही उसे ध्वस्त करने पहुंच गई। अवैध मांस की शिकायतों को नजरंदाज करने वाले प्रशासनिक अफसर भी अब कार्रवाई का हिस्सा बन गए। मनोहरपुरा कट्टीघर को गोपेश्वरनाथ चतुर्वेदी की जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 जुलाई 1998 में सील किया था, लेकिन 18 साल अवैध संचालन जारी रहा।
मनोहरपुरा में तैनात रहेगी पुलिस पिकेट
अवैध बूचड़खाना और मांस की दुकानों पर कार्रवाई करने वाले एडीएम वित्त रवींद्र कुमार ने बताया कि अब मनोहरपुरा में सम्बन्धित स्थल पर पुलिस पिकेट मौजूद रहेगी। इस स्थान को पार्क के रूप में डवलप किया जाएगा। इसकी बाउंड्री बनाई जाएगी।
बूचड़खाने बंद होने पर संतो में हर्ष
उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होते ही बुधवार को जिला प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए मथुरा में बूचड़खाने बंद कराए। इस बात की जानकारी होने पर धर्म नगरी के संत समाज ने हर्ष व्यक्त करते हुए प्रशासन के इस कदम को ब्रजमंडल की धार्मिक छवि के लिए सराहनीय बताया है।
गौरक्षक संत देवस्वरूपानंद महाराज ने कहा कि प्रदेश मे संचालित अवैध बूचड़खानों को तो बहुत पहले ही बंद हो जाना चहिए था, लेकिन किसी भी सरकार ने यह साहसिक कदम नही उठाया। आचार्य देवमुरारी बापू ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह कदम समाज हित में है।
महंत फूलडोल बिहारीदास ने कहा कि बूचड़खाने बंद होने से न केवल निर्दोष जीवों का कटान रूकेगा बल्कि यमुना में कटान के कारण होने वाले प्रदूषण पर भी रोक लगेगी। महामंडलेश्वर नवलगिरी और स्वामी चित्तप्रकाशांनद ने कहा कि प्रदेश में बढ़ते अवैध बूचड़खानों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया यह सख्त कदम सराहनीय है।