दो भाइयों पर अपहरण और बलात्कार का आरोप लगाते हुए अदालत से रिपोर्ट दर्ज करवाने की गुहार लगाने वाली महिला की शिकायत पुलिस जांच में फर्जी निकली। इस पर एडीजे 9 की अदालत ने महिला को छह माह के कारावास और पांच हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है।
6 अप्रैल, 2016 को रुक्मिणी विहार निवासी सुरेश ठाकुर की पत्नी कमलेश ने एडीजे 9 विवेकानंद शरण त्रिपाठी की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर पुलिस को रिपोर्ट के लिए आदेश देने की गुहार लगाई थी। महिला का कहना था कि पुलिस मुकदमा नहीं लिख रही है। महिला ने प्रार्थना पत्र में कहा कि उसकी दो नाबालिग बेटियों को मुकेश और बंटी गौतम निवासी हाथरस बहला-फुसलाकर भगा ले गए थे और जबरन शादी रचा ली है। बलात्कार किया गया है।
महिला के इस प्रार्थना पत्र पर अदालत ने कृष्णानगर चौकी प्रभारी से आख्या मांगी। पुलिस ने जांच करने के बाद अदालत में रिपोर्ट पेश की। कोर्ट में चौकी प्रभारी ने कहा कि उक्त महिला पहले भी कई लोगों पर आरोप लगा चुकी है। पहले तहरीर देती है और बाद में समझौते की बात कहकर तहरीर वापस ले लेती है।
पहले भी सादाबाद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस की रिपोर्ट आने के कुछ समय बाद महिला ने अदालत में प्रार्थना पत्र पेश करके कहा कि अब वह इस मामले को तूल नहीं देना चाहती है। अदालत ने जब सवाल पूछे तो महिला जवाब नहीं दे सकी। अदालत ने माना कि महिला कानून का गलत इस्तेमाल कर रही है।
निर्दोषों को फंसाने के लिए पूरा षड्यंत्र रचा गया था। इस पर अदालत ने कमलेश को छह माह की जेल और पांच हजार के जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में एडीजीसी रविंद्र कुमार ने पैरवी की।