जैंत चौकी क्षेत्र के कस्बा चौमुंहा में 25 दिन पूर्व सिंडीकेट बैंक डकैती के खुलासे के लिए जांच अभी किसी सिरे नहीं चढ़ी है। लुटेरों को पकड़ने के लिए डकैती के दौरान चौमुंहा में लगे टावरों की रेंज में आए मोबाइल नंबरोें को ट्रेस करने की योजना पर काम किया जा रहा है। ये मोबाइल नंबर 90 हजार से अधिक हैं।
21 नवंबर को जैंत चौकी क्षेत्र के कस्बा चौमुंहा में सिंडीकेट बैंक में 30 लाख रुपये की डकैती डाली गई थी। लुटेरे सीसीटीवी कैमरोें की हार्डडिस्क भी निकाल ले गए थे। पुलिस को कोई सुराग नहीं मिली। स्कैच बनाए और 600 लुटेरों के रिकार्ड से मिलान किया लेकिन कोई लीड नहीं मिली।
अब पुलिस 21 नवंबर को डकैती के समय के दौरान चौमुंहा में लगे मोबाइल टावरों की रेंज में आए मोबाइल नंबरों को ट्रेस कर रही है। माना जा रहा है कि डकैतों के पास मोबाइल जरूर होंगे और वह टावरों की रेंज में आए होंगे।
बताया गया कि डकैती के दौरान के एक तय समय में यहां 90 हजार मोबाइल टावर की रेंज में आए। हाईवे के किनारे बैंक होने के चलते वहां से गुजरने वाले लोगों के मोबाइल नंबर भी इसकी रेंज में आ गए हैं।
इन नंबरों को चरणबद्ध तरीके से कम किया जाना है। डकैती के दिन से एक सप्ताह पूर्व से रेंज में आने वाले नंबरों को भी ट्रेस किया जाना है। घटना वाले दिन नंबरों को बैंक कर्मियों के मोबाइल नंबरों के साथ पिन प्वाइंट कर ट्रेस किया जा रहा है।
शनिवार को कोतवाली पुलिस ने अलीगढ़ के कस्बा पिसावा के लुटेरे अविनाश उर्फ हरेन्द्र और भरतपुर के रिंकू वाल्मीकि को इसी प्रक्रिया में पकड़ा था। लेकिन उसने बैंक डकैती में शामिल होने से इंकार किया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है।
बताया गया कि उसे नोएडा के मानवेन्द्र गैंग के सदस्यों ने मथुरा में एक बड़े काम की कहकर बुलाया था। उसके बाद उसे काम नहीं बताया।