रिफाइनरी की पाइप लाइन में सेंधमारी करके तेल की चोरी होती रही मगर रिफाइनरी के अफसरों को खबर नहीं लगी। प्रेशर कम होने के बाद भी पेट्रोलिंग नहीं कराई गई। जबकि कंट्रोल रूम में अलार्म प्रेशर कई दफा ट्रिप हुआ था। अगर शुरुआत में ही किसी ने गंभीरता से लिया होता तो इतनी बड़ी चोरी न हुई होती।
मथुरा रिफाइनरी से पेट्रोल, डीजल, एटीएफ (एविएशन टर्बाइन फ्यूल) की सप्लाई पाइप लाइन के जरिए होती है। तेल माफियाओं ने मथुरा से जालंधर को जाने वाली पाइप लाइन में वाल्व लगाकर बड़ी चोरी की। 18 महीने से तेल की चोरी की जा रही थी। रिफाइनरी सूत्रों का कहना है कि यहां से प्रति माह दो लाख टन तेल की सप्लाई की जाती है। इसमें पेट्रोल और डीजल की मात्रा सर्वाधिक होती है। जब पाइप लाइन चालू होती है तब उसका प्रेशर 50 पास्कल (50 किग्रा/मीटर.सेकंड.सेकंड) होता है।
ऐसे में अगर कहीं लाइन में छोटा-मोटा लीकेज होगा तो वह पता नहीं चलेगा लेकिन अगर कहीं से बड़ी मात्रा में तेल निकल रहा होगा तो अलार्म बज जाएगा। अलार्म बजते ही पेट्रोलिंग कराने की व्यवस्था है। लेकिन 100 करोड़ से भी ज्यादा की तेल चोरी हो गई पर कहीं कोई पेट्रोलिंग कराई ही नहीं गई। रिफाइनरी की अपनी विजिलेंस भी फेल रही। किसी को भनक तक नहीं लगी कि इतने बड़े पैमाने पर तेल की चोरी की जा रही है। बताया जाता है कि अगर कहीं छोटी-मोटी लीकेज होती है तो उसे तो चेक भी नहीं कराया जाता। अगर कहीं पाइप लाइन में छेद हो गया तो तेल यूं ही बहता रहेगा।