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हथियार थामें थीं महिलाएं, तमंचे लोड कर रहे थे बुजुर्ग

Fri, 03 Jun 2016 02:00 AM IST
पुनीत शर्मा
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जवाहर बाग - फोटो : अमर उजाला
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महिलाओं के हाथ में हथियार और तमंचे लोड करते बुजुर्ग। जवाहर बाग में पेड़ पर चढ़कर पुलिस पर सीधी गोलियां चला रहे युवकों को देखकर लग रहा था कि मानो इन्होंने पूरी ट्रेनिंग ले रखी है। खुद को सत्याग्रही कहने वाले पूरी रणनीति बनाकर पुलिस से मुकाबला करने मैदान में उतरे। थानाध्यक्ष फरह संतोष कुमार पर बम फेंका गया। उन्हें निशाना बनाकर गोली चलाई गई। एसपी सिटी, पुलिस क्षेत्राधिकारी को भी निशाना बनाकर हमला किया गया।     
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गृह विभाग को खुफिया एजेंसियां जो रिपोर्ट दे रहीं थीं उसके मुताबिक जवाहर बाग पर कब्जा जमाने वाले लोगों की संख्या दो से ढाई हजार के करीब है। 14 मार्च 2014 को यह लोग एक यात्रा लेकर मथुरा पहुंचे थे। प्रशासन से महज दो दिन के लिए जवाहर बाग में एक दिवसीय धरना देने की अनुमति मांगी। प्रशासन ने भी परमीशन दे दी। दो दिन के लिए जवाहर बाग में दाखिल होने वाली यह भीड़ आज ढाई साल बाद भी यहां से नहीं हटी। इनकी संख्या में भी लगातार इजाफा होता गया।

सूत्रों का कहना है कि इनकी भीड़ में कुछ ऐसे लोग शामिल हो गए जिनके इरादे नेक नहीं थे। वह माहौल बिगाड़ने की कोशिश करते रहे। आहिस्ता आहिस्ता भीड़ पर इन्हीं लोगों ने कंट्रोल कर लिया। 300 एकड़ के इस बाग में जगह जगह तंबू गाढ़ दिए। बाकायदा अपना ठिकाना बना लिया। जब प्रशासन ने निकालने की कोशिश की तो हमला करने लगे। जवाहर बाग में गश्त के लिए नौजवानों की फौज तैयार कर ली गई ।
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गुरुवार को जब पुलिस बाग में दाखिल हुई तो ये लोग ऐसे फायरिंग रहे थे कि मानों की पूरी ट्रेनिंग ले रखी हो। पेड़ों पर से बम फेंके गए और पुलिस पर गोलियां चलाई गईं। महिलाओं के हाथ में भी असलहे थे। जो उम्रदराज गोली चलाने में सक्षम नहीं थे वह बाकायदा असलहे लोड करके दे रहे थे। सब कुछ ऐसे हो रहा था कि पूरी पुलिस से मुकाबला करने को महीनों से तैयारी चल रही हो। जिस तरह से यह हमला कर रहे थे उससे साफ है कि तंबुओं में कारतूस और बमों का जखीरा था। थानाध्यक्ष फरह संतोष कुमार पर भी बम फेंका गया था। उन्हें निशाना बनाकर गोली चलाई गई। एसपी सिटी, पुलिस क्षेत्राधिकारी पर अटैक हुआ।      
 

ढाई साल में बीस बार किए अफसरों पर हमले
जवाहर बाग के कथित सत्याग्रहियों ने ढाई साल के भीतर बीस बार अफसरों पर हमले किए होंगे। सिटी मजिस्ट्रेट और दूसरे अधिकारियों को बंधक बना लिया था। जो भी अफसर इनसे बात करने जवाहर बाग में पहुंचा उसे ही घेर लिया जाता। इनके खिलाफ अब तक थानों में 12 मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं।

ट्रकों में भरकर पहुंचती थी रसद
कथित सत्याग्रहियों को ट्रकों में भरकर रसद पहुंचाई जाती थी। आमतौर पर रात के वक्त वाहन पहुंचते थे। कई लग्जरी गाड़ियां भी रात के अंधेरे में पहुंचती थीं। कभी मध्यप्रदेश के नंबर वाली गाड़ियां यहां आती तो कभी बिहार की।
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