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मथुरा में म्यांमार का युवक गिरफ्तार

Wed, 15 Feb 2017 11:57 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
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म्यांमारके युवक का घर
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पुलिस ने दस वर्षों से मथुरा के गांव औरंगाबाद में रह रहे म्यांमार के युवक को मोहम्मद सादिक मंगलवार शाम को गिरफ्तार किया है। वह वर्ष 2007 में यहां आया था और पहचान छिपाकर पासपोर्ट, आधार कार्ड, राशन कार्ड बनवा लिए थे, साथ ही वोटर लिस्ट में भी अपना नाम दर्ज करा लिया। आतंकी खतरे के लिहाज से संवेदनशील मथुरा में सामने आया यह मामला खुफिया तंत्र की एक बड़ी नाकामी माना जा रहा है। 
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मोहम्मद सादिक थाना सदर बाजार क्षेत्र के गांव औरंगाबाद की नई आबादी में पिछले करीब दस साल से परिवार के साथ रह रहा था और मजदूरी करता है।  मंगलवार को उसे पुलिस ने खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद गिरफ्तार किया है और  उससे थाना सदर बाजार में पूछताछ की जा रही है। खुफिया एजेंसियां भी जानकारी जुटाती रहीं। एसपी सिटी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि सादिक मूलत: म्यांमार के रंगून का रहने वाला है। यह लोग रिफ्यूजी हैं। उसने यहां फर्जी तरीके से पासपोर्ट, राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवा लिया था। उसे गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है।

पासपोर्ट में बदल दिया वालिद का नाम
मोहम्मद सादिक ने जो पासपोर्ट बनवाया है उसमें अपने वालिद का नाम ही बदल दिया है। आधार कार्ड में वालिद का नाम मोहम्मद हुसैन लिखा है जबकि पासपोर्ट आबिद हुसैन के नाम से बनवाया गया है। राशन कार्ड में भी नाम बदला गया है। खास बात यह है कि पासपोर्ट भी स्थायी पते का सत्यापन किए बगैर ही बना दिया गया। अगर कोई औरंगाबाद में उसके घर जाकर देखता तो यह जरूर सोचता कि आखिर वह पासपोर्ट क्यों बनवा रहा है। एक मजदूर को पासपोर्ट की क्या जरूरत पड़ गई।
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ऐसे तो मथुरा में आतंकवादी भी बस जाएंगे
ऐसे तो मथुरा में आतंकवादी भी बस जाएंगे। विदेशों से आने वाले लोग आसानी से अपनी पहचान छुपाकर रह सकते हैं। क्योंकि मथुरा की एजेंसियां तो पूरी तरह से फेल साबित हो रही हैं। पहले जवाहरबाग में एजेंसियां फेल साबित हो चुकी हैं। यह स्थिति तो तब है जब मथुरा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। लेकिन खुफिया एजेंसियों को कोई सूचना तक नहीं मिल पाती है।
    
मथुरा से बन गया था अजमल कसाब का डीएल
मुंबई पर हमला करने वाले आतंकवादी अजमल कसाब का ड्राइविंग लाइसेंस तक मथुरा में बन गया था। जब मामला खुला तो कई लोगों पर गाज गिरी थी। मुंबई हमले में शामिल रहने वाले आतंकवादी अजमल कसाब का मथुरा के आरटीओ आफिस में वर्ष 2009 में ड्राइविंग लाइसेंस बन गया था।

एक युवक आरटीओ आफिस में पहुंचा था और लाइसेंस में लगने वाले सभी दस्तावेज दे दिए थे। बाकायदा कसाब का फोटो भी दिया गया। दफ्तर के बाहर बैठने वाले दलालों ने लाइसेंस बनवा दिया था। देश भर में इसे लेकर हल्ला मचा था। जब जांच हुई तो कई लोगों पर कार्रवाई हुई। अभी तक इस मामले की जांच की जा रही है।

मथुरा से 200 बांग्लादेशी लापता हैं
शहर और आसपास के इलाकों में चिन्हित किए गए करीब 200 बांग्लादेशी लापता हैं। यह वह लोग हैं जिनका खुफिया एजेंसियों ने चेकिंग के दौरान चिन्हीकरण किया था। मगर अब इनका कहीं कोई सुराग नहीं लग रहा है।  

यूं तो हर साल चेकिंग होती है। बांग्लादेशियों की तलाश की जाती है लेकिन बावजूद इसके मथुरा में एक बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रह रहे हैं। करीब 200 बांग्लादेशी तो ऐसे हैं जो अब खुफिया रिकार्ड से ही गायब हैं। अब यह कहां हैं और किस हाल में रह रहे हैं किसी को नहीं पता। इन लोगों के बारे में भी खुफिया एजेंसियां कोई जानकारी नहीं कर पाई हैं। यह स्थिति तो तब है जब बांग्लादेश का दुर्दांत आतंकी संगठन हूजी भारत के कई राज्यों के अंदरूनी इलाकों तक अपना नेटवर्क बना चुका है।

हाई सिक्योरिटी जोन की सुरक्षा में बड़ी सेंधमारी
हाईसिक्योरिटी जोन में शामिल मथुरा की सुरक्षा में सेंधमारी का यह बड़ा मामला है। म्यामांर का एक युवक बारह साल से परिवार के साथ यहां रहता रहा लेकिन किसी को इसकी खबर नहीं हुई।
पुलिस ने जिस मोहम्मद सादिक को गिरफ्तार किया है वह मथुरा शहर से सात किलोमीटर दूर औरंगाबाद गांव की नई आबादी में मकान बनाकर रह रहा है।

परिवार में उसकी पत्नी और दो बच्चे बताए जा रहे हैं। वह मजदूरी करता था। वह यहां बतौर भारतीय नागरिक को मिलने वाली सुविधाओं का लाभ उठा रहा था। देश में मान्य पहचान संबंधित सभी आईडी उसके पास थी। आधार कार्ड, मतदाता सूची और पासपोर्ट में उसके पिता का नाम भी अलग है।  

पुलिस अफसरों का कहना है कि वह रिफ्यूजी है। लेकिन सवाल यह है कि एक रिफ्यूजी को बगैर नागरिकता दिए भारतीय नागरिकों तो मिलने वाली सुविधाएं कैसे मिलती चलीं गईं।  हर सुविधा के लिए सत्यापन का प्रावधान है। अस्थायी और स्थायी दोनों पते पूछे  जाते हैं, उनका प्रमाण देना होता है। साफ है कि बिना जांच किए सादिक के आवेदनों का सत्यापन किया जाता रहा।
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