संकल्प आनंद आत्महत्या प्रकरण में संकल्प की नौकरी वाले संस्थान से मिले 40 सवालों के जवाब संस्थान में हुए घोटाले की कई परत खोल रहे हैं। इधर मथुरा क्राइम ब्रांच की टीम एक एक जवाब पढ़कर नए सवाल भी तैयार कर रही है। हो सकता है एक बार फिर से संस्थान निदेशक और मामले में नामजद लोगों से पूछताछ की जाए या उनके बयान लिए जाएं।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण अपराध विधि विज्ञान शास्त्र संस्थान की निदेशक से मिले जवाबों के बारे में सोमवार को क्राइम ब्रांच ने और खुलासा किया। एसपी क्राइम अशोक कुमार रॉय ने बताया है कि संकल्प और उनकी पत्नी नरेश नंदिनी की आत्महत्या से पहले संकल्प ने मुंबई के सारंग हनीफ डेवलेपर्स के नाम 36 करोड़ रुपये से अधिक के चेक जारी किए थे। इसमें 11 करोड़ 23 लाख, 13 करोड़ 60 लाख 86 हजार और 11 करोड़ 23 लाख 30 हजार के चेक निजी खाते से जारी किए। एक चेक खाते में पर्याप्त राशि न होने के कारण बाउंस भी हो गया। एसपी क्राइम के अनुसार संस्थान के तत्कालीन निदेशक डीजी कमलेंद्र ने कम अनुभवी संकल्प आनंद को संस्थान के लिए की जाने वाली सरकारी सामान की खरीद फरोख्त का जिम्मा दे दिया था। इसमें प्रिंटिंग प्रेस, मोमेंटो खरीद, शिक्षण सामग्री और अन्य सामान शामिल था। वर्ष 2011 में नौकरी लगने के बाद संस्थान के उपनिदेशक एसी राजवंशी ने संकल्प को ट्रेनिंग दी। ट्रेनिंग के लिए राजवंशी के पास संकल्प को तब भेजा गया जब उनके रिटायरमेंट के कुल तीन माह बचे थे। सुइसाइड नोट में संकल्प संस्थान के प्रशासनिक अधिकारी रहे डीआईजी संदीप मित्तल पर उन्हें नियमित न करने का आरोप लगाया है। जबकि भेजे गए जबाव में लिखा है कि संदीप मित्तल ने नियमित करने के लिए अनुमोदन पत्र लिखा था। जबाव में बताया है कि पत्र को संबंधित बाबू ने आगे नहीं बढ़ाया। संस्थान की ओर से इसकी विभागीय जांच की जा रही है। एसपी क्राइम अशोक कुमार रॉय ने बताया कि अब संकल्प के नौकरी लगने से लेकर आत्महत्या से पहले तक हुए लेनदेन का रिकार्ड दिल्ली की रोहिणी स्थित महाराष्ट्र बैंक से मांगा जा रहा है। इसके लिए बैंक को पत्र लिखा जाएगा।
दिल्ली क्राइम ब्रांच में कराई थी रिपोर्ट
मथुरा। संकल्प आनंद ने खुद को 250 करोड़ रुपये के घोटाले में फंसाने की शिकायत दिल्ली क्राइम ब्रांच से की थी। इसमें 28 मई 2012 को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने प्राथमिकी दर्ज की। अब तक इसमें विवेचना ही चल रही है।