बलात्कार पीड़िता के प्री डिलीवरी बच्चे की मौत के मामले में अदालत ने महिला अस्पताल की डाक्टर के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया है। वहीं किशोरी के मां-बाप को भी दोषी ठहराया गया है।
शहर कोतवाली क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ गैंगरेप हुआ था। पुलिस ने 16 दिसंबर (2016) को पॉक्सो कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। कोर्ट ने चार्जशीट में दर्ज नाबालिग के उस बयान का संज्ञान लिया जिसमें उसने कहा था कि उसके पांच माह के बच्चे की घर वालों ने महिला अस्पताल ले जाकर डिलीवरी करा दी थी। जिसकी कुछ देर बाद मौत हो गई थी।
अपर सत्र न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने सीएमओ को नोटिस जारी कर इस प्रकरण की जांच मेडिकल बोर्ड से कराने को कहा। सीएमओ की ओर से गठित बोर्ड ने नौ जनवरी को कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश कर दी। रिपोर्ट में बोर्ड ने कहा कि इसमें डाक्टर का कोई दोष नहीं है। बच्चा 21 सप्ताह का था जिसके जीवित होने की संभावना ना के बराबर होती है।
वहीं अदालत ने महिला अस्पताल की डाक्टर मीनाक्षी के उस बयान को आधार मान लिया जो चार्जशीट में था। चार्जशीट में मीनाक्षी ने कहा था कि किशोरी को लेकर उसके मां-बाप अस्पताल आए थे। कुछ ही देर में बच्चा पैदा हो गया था। हमने जीवित बच्चे को किशोरी के चाचा के हवाले किया था। इस पर न्यायालय ने कहा कि जब डाक्टर जानते हैं कि पांच माह के बच्चे की बचने की संभावना कम रहती है तो उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी। डाक्टर ने अपनी ड्यूटी का ईमानदारी के साथ निर्वाह नहीं किया है।
इस पर अदालत ने डा. मीनाक्षी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (304 ए) के खिलाफ कोर्ट में केस दर्ज कर लिया है। वही माता-पिता और चाचा के खिलाफ भी अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर समन जारी कर दिए हैं।