विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त के बाद रविवार को हुई कांग्रेस की समीक्षा मीटिंग में हालात बिगड़ गए। एक-दूसरे पर आरोप से शुरू हुआ हंगामा थोड़ी ही देर में मारपीट में बदल गया। इस दौरान जमकर लात घूंसे चले। पदाधिकारियों ने एक दूसरे पर चापलूसी करके पद हासिल करने का आरोप लगाया। इस दौरान कांग्रेसियों ने जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष से इस्तीफा देने की भी बात कही।
विधानसभा चुनाव के बाद रविवार को जिला और शहर कांग्रेस की पहली बैठक जिला कार्यालय पर आहूत हुई। इसमें कांग्रेस सदस्यता अभियान और नगर निकाय चुनाव की तैयारियों की समीक्षा होनी थी। प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप कंसल के सामने बैठक शुरू होते ही पुराने कांग्रेसियों ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि जो भी पूर्व विधायक प्रदीप माथुर, जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष की चापलूसी करता है उसे ही पद दिए जा रहे हैं। ऐसे लोगों को बड़े पद दे दिए गए जिनका कोई जनाधार ही नहीं है।
कांग्रेसियों ने कहा कि पूर्व विधायक प्रदीप माथुर ने कांग्रेस को प्राईवेट पार्टी बना डाला। कहा कि इतनी बड़ी हार के बाद जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष को पहले ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। आरोप-प्रत्यारोप के बीच आपस में मारपीट भी होने लगी। बीच बचाव कराने आए नेताओं की भी एक न चली। कुछ पुराने नेताओं ने एक-दूसरे को अलग करके जब समझाया तो मामला शांत हुआ।
जिलाध्यक्ष सोहन सिंह सिसौदिया ने कहा कि बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी-अपनी बात रखी। मारपीट जैसी कोई बात नहीं हुई है। शहर अध्यक्ष आबिद हुसैन, रणवीर सिंह पांडव, अब्दुल जब्बार, उमेश भारद्वाज, देवेंद्र यादव, मलिक अरोड़ा, संजय शर्मा, राजरानी निमेष समेत अन्य मौजूद रहे।
पूर्व विधायक प्रदीप माथुर का कहना है कि हर कार्यकर्ता को अपनी बात कहने का अधिकार होता है। हल्का फुल्का हंगामा हुआ है मारपीट जैसी कोई बात नहीं है। संगठन में हमेशा उन्हीं लोगों को स्थान मिलता रहा है जो पार्टी के प्रति वफादार और कर्मठ हैं।
हंगामे के बीच खगुल ने दिया इस्तीफा
रविवार को बैठक में हंगामे के बाद कांग्रेस नेता खगुल भारद्वाज ने अपना इस्तीफा जिलाध्यक्ष सोहन सिंह सिसौदिया को सौंप दिया। उन्होंने पार्टी के प्रदेश स्तर के एक नेता पर पैसे लेकर टिकट वितरण और भाई भतीजावाद का आरोप लगाया। खगोल ने कहा कि यदि यही हालात रहे तो पार्टी पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।