थाना हाइवे क्षेत्र के मोतीकुंज एक्सटेंशन में रियल एस्टेट कंपनी कर्मयोगी होम्स के डायरेक्टर उमेश चंद वर्मा (50) ने रविवार को फांसी लगाकर जान दे दी। उनका शव बेडरूम में पंखे से लटका मिला। उनके बेटे का आरोप है कि उसके पिता को कंपनी के मालिक प्रताड़ित कर रहे थे। जिसके कारण वह डिप्रेशन में थे।
मृतक उमेश चंद वर्मा पुत्र कल्याण मूलरूप से मैनपुरी के रहने वाले थे और बी-44 मोतीकुंज एक्सटेंशन कर्मयोगी बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड में बतौर कर्मचारी और कर्मयोगी होम्स में डायरेक्टर थे। रविवार की सुबह छह बजे हाइवे पुलिस को उनके आत्महत्या करने की सूचना दी गई। पुलिस के पहुंचने से पहले ही परिवार वालों ने उमेश वर्मा के शव नीचे उतार लिया था।
बताया जाता है कि पुलिस को कमरे से एक डायरी भी मिली, जिसमें छह लोगों का नाम और उनके प्रताड़ित करने की बात लिखी हुई थी। ये नाम कर्मयोगी बिल्डर के स्वामियों के बताए जा रहे हैं। हालांकि पुलिस अभी इन नामों का खुलासा नहीं कर रही है। प्रभारी निरीक्षक राजीव सिंह ने बताया कि पत्नी के दुपट्टे का फंदा बनाकर डायरेक्टर ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है।
साल 2014 में कर्मयोगी बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड और कर्मयोगी होम्स के स्वामी दिनेश अग्रवाल,कर्मयोगी होम्स के निदेशक उमेश चंद वर्मा समेत एक दर्जन के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में अगस्त 2015 में पुलिस ने उमेश वर्मा गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। फरवरी, 2016 में जमानत पर वह बाहर आए। बताया जा रहा है कि 13 दिसंबर को इस मामले का फैसला आना था।
डायरी में लिखा, मेरे साथ हो रही साजिश
कर्मयोगी होम्स के डायरेक्टर उमेश चंद वर्मा ने जिस कमरे में खुदकुशी की वहां पुलिस को एक डायरी मिली है। इसमें लिखा है कि मेरे साथ साजिश हो रही है। दिनेश कुमार अग्रवाल और विश्वनाथ अग्रवाल मुझे फंसा देंगे। इसमें अन्य नाम भी हैं। पुलिस अभी डायरी में लिखे इन आधा दर्जन नामों का खुलासा नहीं कर रही। हालांकि प्रभारी एसएसपी अरुण कुमार सिंह ने डायरी में लिखी उक्त लाइनों का जिक्र जरूर किया।
दिनेश अग्रवाल, विश्वासनाथ अग्रवाल से परेशान थे पापा
मृतक उमेश चंद वर्मा के इंजीनियर पुत्र विक्रम वर्मा का कहना है कि पापा को बेवजह कर्मयोगी बिल्डर के स्वामी दिनेश कुमार अग्रवाल और विश्वनाथ अग्रवाल परेशान कर रहे थे। बार-बार दिल्ली बुलाया जाता था। न जाने पर केस में फंसाने की धमकी दी जाती थी। इसी के चलते उनके पापा ने ऐसा कदम उठाया। पापा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री से लेकर हर अफसर से शिकायत की थी लेकिन उनके पापा को कोई बचा नहीं सका। उनके पिता ने न कोई जमीन खरीदी और न ही बेची है।
आरोप निराधार, जमानत हमने कराई: दिनेश
कर्मयोगी ग्रुप के डायरेक्टर दिनेश कुमार अग्रवाल सभी आरोपों को निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि उमेश चंद वर्मा की जमानत भी हाइकोर्ट से उन्होंने ही कराई थी। वह हमारा बच्चा था। पांच माह पहले भी उमेश ने आत्महत्या की कोशिश की थी, लेकिन उसे बचा लिया गया। उमेश को विश्वनाथ अग्रवाल रोज डराता, धमकाता था, जिसके कारण उसने ऐसा कदम उठाया।
उमेश पर थी कई लोगों की देनदारी: विश्वनाथ
कर्मयोगी ग्रुप के डायरेक्टर विश्वनाथ अग्रवाल का कहना है कि उनकी ओर से लिखाए गए मुकदमे में ही उमेश चंद वर्मा धोखाधड़ी के आरोप में जेल गए थे। यह मुकदमा साल 2014 में लिखा गया था। 13 दिसंबर को इस मामले का फैसला होना था, जिसके चलते उमेश ने ऐसा कदम उठाया होगा। उमेश पर कई ग्राहकों की देनदारी थी।
फर्जीवाड़े में रहे छह माह जेल में
कर्मयोगी बिल्डर प्राइवेट लिमिटेड और कर्मयोगी होम्स के स्वामी दिनेश अग्रवाल समेत एक दर्जन के खिलाफ फर्जीवाड़े में साल 2014 में मुकदमा दर्ज हुआ था। कर्मयोगी होम्स के निदेशक उमेश चंद वर्मा भी इसमें नामजद थे। अगस्त, 2015 में धोखाधड़ी के मामले में वो जेल भी गए। फरवरी, 2016 में जमानत पर बाहर आए। बताया जाता है कि 13 दिसंबर को इस मामले का फैसला आना था।
बंगलूरू में रहते हैं दोनों पुत्र
मृतक उमेश चंद का बड़ा बेटा विक्रम वर्मा वर्तमान में विक्रम बंगलूरू स्थित एक फर्म में साफ्टवेयर इंजीनियर है। छोटा बेटा मोहित वर्मा वहीं रहकर पढ़ाई कर रहा है। पिता की मौत की खबर लगते ही विक्रम दिन में मथुरा पहुंच गया जबकि छोटे पुत्र की देर शाम मथुरा पहुंचने की बात कही जा रही है। मृतक की धर्मपत्नी ऊषा और दोनों पुत्रों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मूलरूप से मैनपुरी के हैं उमेशचंद
उमेश चंद मूलरूप से मैनपुरी के करहल के रहने वाला थे। उनके पिता कल्याण वर्मा मथुरा में तहसीलदार रहे थे। जिस कारण शिक्षा-दीक्षा यहीं ग्रहण की और बाद में कार्य भी यहीं करने लगे।