जिले में लगातार महिलाओं के शव मिलना एक पहेली बन गया है। बीते आठ माह में 10 महिलाओं के शव मिले हैं जिनकी हत्या की गई थी। अधिकांश में हत्या का तरीका भी एक जैसा है। सभी को चाकुओं से गोदा गया और शव हाईवे किनारे या लिंक रोड के किनारे फेंक दिया।
जनवरी 2016 से अगस्त तक जिन 10 महिलाओं की हत्या की गई, उनमें सभी की उम्र 25 से 35 साल के करीब बताई जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार अधिकांश की हत्या पेट में चाकू घोंपकर की गई है। प्राइवेट पार्ट पर भी जख्म मिले थे। हत्यारों ने शव को कहीं हाईवे किनारे फेंका है तो कहीं हाईवे से सटे लिंक मार्ग पर। सभी शव ऐसे स्थानों पर मिले हैं जहां चार पहिया वाहन जा सके।
पुलिस ने इन सभी केस में जो रिपोर्ट लगाई है उसमें कहा है कि महिलाओं की हत्या कहीं और करके शव यहां फेंके गए हैं। सदर बाजार, गोविंदनगर, हाईवे, कोतवाली, वृंदावन, मगोर्रा, महावन, मांट, रिफाइनरी, राया, बलदेव, छाता और कोसी थाना क्षेत्र में यह शव बरामद किए गए थे। पुलिस ने इनकी पहचान के लिए आसपास के जिलों और राज्यों को भी सूचना दी लेकिन पहचान नहीं हो सकी है। अफसरों का कहना है कि मथुरा से हरियाणा और राजस्थान की सीमाएं जुड़ी हुईं हैं लिहाजा यहां के अपराधी भी हो सकते हैं।
पांच के साथ किया गया रेप
जिन दस महिलाओं की हत्या कर शव फेंके गए उनमें पांच के साथ रेप की पुष्टि हो चुकी है। तीन के साथ गैंगरेप की पुष्टि हुई। शुक्रवार को फरह क्षेत्र में बैग में जिस महिला का शव मिला है उसमें भी बलात्कार की आशंका व्यक्त की जा रही है।
पोस्टरों तक सिमटी शिनाख्त
यूं तो अज्ञात शवों की पहचान के लिए लंबा चौड़ा प्रावधान है। दूरदर्शन तक पर प्रचारित कराया जाना चाहिए। हर राज्य के थाना और चौकी पर पर पोस्टर होना चाहिए। सभी लावारिस लोगों का डाटा इकट्ठा करके पहचान कराई जाए। लेकिन, कहीं कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं। पुलिस बस पोस्टर लगाकर ड्यूटी खत्म कर लेती है।