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Mathura: अदालत ने तलब की ईदगाह की अमीन रिपोर्ट, अमर उजाला ने सबसे पहले दी थी रिपोर्ट संबंधी खबर

Sat, 01 Apr 2023 12:31 AM IST
Digvijay Singh संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा

सार

अमीन रिपोर्ट संबंधी इस आदेश को सबसे पहले अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उधर इस आदेश को पुन: सुने जाने ओर रोक लगाने संबंधी ईदगाह पक्ष के प्रार्थना पत्र पर अगली सुनवाई की तारीख 17 अप्रैल तय की है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह प्रकरण में सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी नीरज गोंड ने 8 दिसंबर 2022 के आदेश के अनुपालन में ईदगाह की अमीन रिपोर्ट तलब की है। वहीं, हिंदू सेना की ओर से पेश अधिवक्ता शैलेष दुबे ने शुक्रवार को अमीन रिपोर्ट संबंधी अदालत के आदेश की प्रति हासिल की। वह इस संबंध में 8 दिसंबर 2022 को दिए आदेश के बाद सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत को सभी कागजात सौंप चुके हैं। अमीन रिपोर्ट संबंधी इस आदेश को सबसे पहले अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। उधर इस आदेश को पुन: सुने जाने ओर रोक लगाने संबंधी ईदगाह पक्ष के प्रार्थना पत्र पर अगली सुनवाई की तारीख 17 अप्रैल तय की है।

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सिविल जज सीनियर डिवीजन तृतीय सोनिका वर्मा की अदालत द्वारा दिए अमीन रिपोर्ट संबंधी आदेश का ईदगाह की इंतजामिया कमेटी के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने यह कहकर विरोध किया कि पहले उन्हें नहीं सुना गया। इसी के चलते सिविल जज सीनियर डिवीजन में ईदगाह पक्ष की बात सुनी गई। ईदगाह पक्ष ने केस को सुने जाने योग्य है या नहीं इस पर सुनवाई की मांग की। सिविल जज सीनियर डिवीजन की पीठासीन अधिकारी के स्थानातंरण के बाद केस की फाइल सिविल जज सीनियर डिवाीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी के समक्ष आ गई और उन्होंने पक्षकार विष्णु गुप्ता के अधिवक्ता शैलेष दुबे की अमीन रिपोर्ट मंगाए जाने संबंधी प्रार्थना पत्र पर आदेश कर दिया। 

 

अदालत में यहां पर भी ईदगाह के सचिव द्वारा आदेश 7 नियम 11 यानि कि केस सुने जाने योग्य है या नहीं इस पर सुनवाई की मांग की गई, जिसे नजरअंदाज करते हुए अदालत ने सीनियर सिविल जज तृतीय के आदेश के अनुपालन में अमीन रिपोर्ट का आदेश जारी किया। पक्षकार के अधिवक्ता शैलेष दुबे ने बताया कि उन्हें 29 मार्च को आदेश की प्रति नहीं मिल सकी थी, जो आज मिली है। अब अदालत में तैनात अमीन शिशुपाल ईदगाह का निरीक्षण कर रिपोर्ट पेश करेंगे।

क्या होती है अमीन रिपोर्ट
तहसील में अमीन के पद को बहुत छोटा माना जाता है, लेकिन अदालत में वही पद बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। क्योंकि इसी अमीन द्वारा सिविल वाद में सबसे पहले अदालत की ओर से मौका मुआयना किया जाता है। वह मौके पर जाकर अदालत में चल रहे विवाद के नजरिए से निरीक्षण कर रिपोर्ट देता है जोकि केस का आधार होता है। अमीन रिपोर्ट को सच मानते हुए अदालत आगे की कार्यवाही करेगी।

 

प्रतिवादीगण के प्रार्थना पर 17 को होगी सुनवाई
प्रतिवादीगण ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव अधिवक्ता तनवीर अहमद ने सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में दो पेज का प्रार्थना पत्र दिया है, जिसमें उन्होंने ईदगाह की अमीन आख्या मंगाए जाने संबंधी आदेश को चुनौती दी। उन्होंने कहा कि सिविल जज सीनियर डिवीजन ने वाद की पोषणीयता पर आदेश 7 नियम 11 सीपीसी में सुनवाई के आदेश किए थे और सुनवाई चल भी रही थी। इसलिए ईदगाह की अमीन रिपोर्ट संबंधी आदेश को रोका जाए तथा आदेश 7 नियम 11 पर सुनवाई होकर यह तय हो कि केस सुने जाने योग्य है या नहीं। उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इससे पहले महेन्द्र प्रताप सिंह और मनीष यादव के केस में भी अदालत ने पोषणीयता पर सुनने संबंधी ही निर्णय लिया है। अदालत ने उनके प्रार्थना पत्र पर सुनवाई के लिए 17 अप्रैल की तारीख दी है।

आशुतोष पांडेय के वाद में पोषणीयता पर होगी सुनवाई
सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशुतोष पांडेय के वाद में अदालत ने केस की पोषणीयता पर आदेश 7 नियम 11 सीपीसी पर सुनवाई का निर्णय लिया है। पक्षकार ने अदालत से पहले अमीन रिपोर्ट करवाए जाने की मांग की थी जबकि ईदगाह इंतजामिया कमेटी के सचिव एडवोकेट तनवीर अहमद ने पोषणीयता पर पहले सुने जाने की मांग की। अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 14 अप्रैल की तारीख तय की है।
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जिला जज की अदालत में लगाया आपत्ति सूचना प्रार्थना पत्र
श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशुतोष पांडेय ने जिला जज की अदालत में आपत्ति सूचना (कैवियट )का प्रार्थना पत्र दिया है। उन्होंने बताया कि ईदगाह पक्ष सिविल जज सीनियर डिवीजन ने किए अमीन रिपोर्ट संबंधी आदेश के खिलाफ यदि जिला जज की अदालत में रिवीजन में जाता है तो अदालत आपत्ति सूचना प्रार्थना पत्र पर हमें भी सुनें। इसके बाद ही अमीन रिपोर्ट के निर्णय संबंधी रिवीजन पर कोई निर्णय लिया जाए।
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