मथुरा। न्यायालय में स्थान होने के बाद भी करीब दो किलोमीटर दूर क्लेम कोर्ट बनाए जाने को लेकर वकीलों का विरोध जारी है। उनके द्वारा कोर्ट के सामने न केवल धरना दिया जा रहा है बल्कि कार्य से भी विरत हैं। बार ने इस संबंध में प्रधान न्यायमूर्ति को पत्र लिखकर क्लेम कोर्ट को तत्काल अनुचित स्थान से हटाने की मांग की है।
मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल की मांग को लेकर बार एसोसिएशन ने गंभीर रूप अख्तियार कर लिया है। बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुशील शर्मा एवं सचिव सुनील चतुर्वेदी की ओर से उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रधान न्यायमूर्ति को शुक्रवार को एक पत्र लिखा गया है। जिसमें कहा गया है कि जिला न्यायालय परिसर अथवा कलक्ट्रेट परिसर में क्लेम कोर्ट स्थापित की जाए।
जिला न्यायालय परिसर से दो किलोमीटर दूर क्लेम कोर्ट में फेज-ए आम कॉलेज तक आने जाने का कोई सार्वजनिक साधन नहीं है। इसके अलावा वहां तक आने-जाने का एकांत एरिया है, जहां वादकारी महिलाओं के साथ कोई घटना-दुर्घटना हो सकती है। क्योंकि अधिकांश केसों में महिलाएं ही वादकारी हैं। क्लेम के केसों के अलावा वकील फौजदारी व दीवानी से संबंधित केसों में भी वकालत करते हैं, जिनका दो किलोमीटर दूर जाकर कार्य करना संभव नहीं होगा।
बार एसोसिएशन द्वारा प्रमुख सचिव विधि सचिव परिवहन सचिव उत्तर प्रदेश शासन के अलावा जिला जज मथुरा जिलाधिकारी मथुरा को भी पत्र लिखे गए हैं। उधर, शुक्रवार को क्लेम कोर्ट के बाहर अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहकर धरने पर बैठे रहे। धरने पर बैठने वालों में ब्रजेश शर्मा, ओमवीर सारस्वत, बार एसोसिएशन के पूर्व सचिव सतीश शर्मा, अजीत तेहरिया, दीपक अग्रवाल, अरविंद गौतम, रघुनाथ राजावत, संजीव चंद्रा, पीके पचौरी, रामवीर यादव, राजेश चतुर्वेदी, प्रणात शर्मा, सुधीर शर्मा, नरेंद्र शर्मा आदि थे।