कोर्ट परिसर में लोगों से पूछताछ और चेकिंग करती पुलिस।
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मथुरा। भरतपुर के राजा मानसिंह की हत्या के मामले में बुधवार को जिला न्यायालय में सजा सुनाई गई। इस दौरान न्यायालय परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। सुबह से ही पुलिस और पीएसी ने मोर्चा संभाल लिया था। कचहरी की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरियर लगाकर वाहनों को रोक दिया गया। केवल अधिवक्ताओं के वाहन ही कचहरी के सामने पहुंचे। कचहरी के दोनों गेटों पर मेटल डिटेक्टर से जांच, थर्मल स्क्रीनिंग की गई, हाथों को सैनिटाइज किया गया।
राजा मानसिंह की हत्या के मामले में 35 साल बाद ऐसा दिन आया जब 11 पुलिसकर्मियों को सजा सुनाई गई। इस मामले को हमेशा से गंभीरता से ही लिया गया। जब-जब सुनवाई हुई कचहरी परिसर की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। मंगलवार को इस मामले में फैसला होना था, जिसके लिए न्यायालय परिसर को कड़े सुरक्षा घेरे में लिया गया था। जिला जज ने 11 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया।
बुधवार को इस मामले में सजा सुनाई गई। इसके लिए सुबह से ही पुलिस प्रशासन अलर्ट रहा। कचहरी की ओर जाने वाले मार्गों पर बैरियर लगा दिए गए। सीओ सिटी आलोक दुबे कचहरी पर पहुंच गईं। अधिवक्ताओं को छोड़कर किसी के वाहन कचहरी के सामने नहीं गए। कचहरी के दो गेटों से लोगों को प्रवेश दिया गया। मेटल डिटेक्टर से लोगों की जांच हुई तथा कोरोना वायरस से बचाव के लिए थर्मल स्क्रीनिंग और सैनिटाइजर की व्यवस्था की गई थी। कचहरी परिसर में जगह-जगह पुलिस और पीएसी के जवान तैनात थे। कुछ पुलिसकर्मी छतों पर भी तैनात थे। पुलिस की गाड़ी में सभी दोषी जब कचहरी पहुंचे तो उनका सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया गया। कड़ी सुरक्षा में ही सभी को न्यायालय ले जाया गया।