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Mathura News: नई शिक्षा नीति पर विधान परिषद की सांविधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान की संगोष्ठी का समापन

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वृंदावन। उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सांविधानिक एवं संसदीय अध्ययन संस्थान द्वारा नई शिक्षा नीति की उपयोगिता और समसामयिकता विषयक संगोष्ठी का सोमवार को समापन हो गया। फोगला आश्रम में हुई संगोष्ठी में विद्वानों ने कहा कि नई शिक्षा नीति से देश में मैकाले की शिक्षा पद्धति का समापन होगा।
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विधान परिषद अध्यक्ष कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा नई शिक्षा नीति में समाज और राष्ट्र के समक्ष जो प्रत्यक्ष चुनौतियां हैं, उनका सामना करने की अच्छे ढंग से चिंता की गई है। विश्व पटल पर देश एक आर्थिक शक्ति बनकर उभरे तथा हर नौजवान को रोजगार मिले, इसका ध्यान रखा गया है। तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक शिक्षा और आर्थिक प्रबंधन के लिए नौजवानों को देश में कोई सुविधा मिले, इसका ध्यान रखा है। यहां आए प्रतिवेदनों को केंद्रीय शाखा को प्रस्तुत किया जाएगा।
संस्थान के सचिव राजबहादुर सिंह ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 न केवल रोजगार परक है बल्कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सहायक बनेगी। इस नई शिक्षा नीति से युवा पीढ़ी भारतीय संस्कृति के नैतिक मूल्यों से ओतप्रोत होकर संस्कारित होगी। कहा कि लोकतंत्र में शिक्षा का दायित्व शासन के हाथ में होना चाहिए। हर स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में सकल घरेलू आय का 6 प्रतिशत शिक्षा के विकास, संसाधनों की उपलब्धता, आधारभूत संरचना को मजबूत करने का सरकार का दायित्व होना चाहिए। शिक्षा को देश के सर्वांगीण विकास के लिए किसी विचारधारा को थोपने की दृष्टि से नहीं बल्कि संवैधानिक दायित्वों को ईमानदारी से निर्वाह करने की नीति के अंतर्गत विकसित करने का दीर्घकालिक लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति, समग्र भारत के परिवेश के अनुकूल होनी चाहिए। भारत गांवों का देश है, लगता है शहरी परिवेश की छाया इस नई नीति पर पड़ गई है। जब तक शिक्षा की नीति ग्रामीण भारत के परिवेश में नहीं बनेगी तब तक ज्ञानवान भारत नहीं बन सकेगा।
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प्रोफेसर ब्रजेश चंद्रा ने कहा कि किसी भी नीति की सार्थकता इस बात पर निर्भर करती है कि उसका कार्यान्वयन किस तरह किया जा रहा है। वही नीति सफल होगी जो देश काल और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर बनाई जाये। नीतियों का निर्धारण इस दृष्टिकोण से होना चाहिए कि उसका लाभ सुगमता से लोगों तक पहुंच सके। इस अवसर पर विधान परिषद के प्रमुख सचिव राजेश सिंह, विजय रमण आचार्य, डॉ. देव प्रकाश शर्मा, डॉ. अरुण कुमार यादव, डॉ. अल्पना यादव ने भी विचार रखे।
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