दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे से जुड़े जिले के आठ गांव के किसानों को जमीन मुआवजे में बड़ा फायदा होने जा रहा है। इन गांवों की जमीन की कीमत मुआवजे के तौर पर सिर्फ कृषि आधार पर तय नहीं होगी, इसमें यथास्थिति के अनुरूप मुआवजा मिलेगा।
दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे को सिक्सलेन में बदलने का कार्य पिछले कई वर्षों से चल रहा है। इस प्रक्रिया में अधिग्रहीत की गई जमीन का मुआवजा किसानों को दिया जा रहा है। अभी हाईवे से सटे अनेक गांवों की जमीन को लेकर विवाद है। इसमें छाता क्षेत्र प्रमुख रूप से शामिल है।
इसके अलावा फरह के आसपास भी यही स्थिति है। इसमें दौलतपुर, नगला चंद्रभान, फरह, रैपुराजाट, पौरी, शहजादपुर पौरी, चोकीपुर खर्द और जलाव शामिल हैं। सरकारी रिकार्ड में इन गांवों से जुड़ी जमीन कृषि में दर्ज है। वास्तविकता में यहां आबादी क्षेत्र भी मौजूद है।
हाईवे प्राधिकरण द्वारा संबंधित किसानों को कृषि दर के मुताबिक ही मुआवजा दे रहा है लेकिन इसके खिलाफ संबंधित किसानों ने आरबी ट्रेटर में अपील की। इस पर जांच पड़ताल के बाद उपरोक्त गांवों से जुड़ी जमीन के संदर्भ में आई रिपोर्ट के मुताबिक इन क्षेत्रों में आबादी भी मौजूद है। इसके मुताबिक अब हाईवे प्राधिकरण को यथास्थिति के मुताबिक जमीन का मुआवजा देना होगा। इसमें कृषि जमीन पर कृषि दर से और आवासीय जमीन पर आवासीय दर से भुगतान होगा। दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे से जुड़े उपरोक्त गांवों के बड़ी संख्या में किसानों को बड़ा लाभ होगा।
कृषि में दर्ज था फरह
कस्बा होने के बावजूद फरह क्षेत्र कृषि में दर्ज था। ऐसे में हाईवे से सटी कस्बा की आबादी वाली जमीन का मुआवजा कृषि दर पर ही दिया जा रहा था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
किसानों की होगी तरक्की
अब तक विवादों में उलझी मुआवजा राशि तय होने के बाद किसानों को आर्थिक लाभ होगा। साथ ही संबंधित परिवार की तरक्की की राह भी खुल जाएगी। संबंधित लोगों की जमीन तो अधिग्रहीत कर ली है, लेकिन मुआवजा नहीं मिला था। अब राशि मिलने से किसान अपने लिए रोजगार की व्यवस्था कर सकेंगे।