कोसीकलां स्थित गुहेता दस विसा के दर्जनों किसानों का मुआवजा स्वामित्व के विवाद में अटका हुआ है। जमीन पर कब्जा किसानों का है, जबकि स्वामित्व मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के नाम है। ओलावृष्टि से प्रभावित किसान एमवीडीए में मुआवजे की गुहार लगा रहे हैं।
गुहेता दसविसा आवासीय योजना में जमीन अधिग्रहण का मुद्दा करीब एक दशक पुराना है। इस योजना की आधी जमीन कोर्ट के आदेश पर अधिग्रहण मुक्त हो चुकी है, जबकि आधी जमीन पर स्वामित्व मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण का है। हालांकि इस जमीन पर भी कब्जा किसानों का ही बरकरार है। आधी जमीन अधिग्रहण से मुक्त होने के बाद विकास प्राधिकरण अब बाकी जमीन पर भी योजना तैयार करने के मूड़ में नहीं है। प्राधिकरण इस योजना में अधिग्रहीत जमीन को छोड़ने पर विचार कर रहा है।
यहां कब्जा धारक किसानों को ओलावृष्टि से प्रभावित फसल का मुआवजा मिलना है, लेकिन स्वामित्व मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण के नाम होने के कारण इस राशि का चेक अभी नहीं बन सका है। किसानों ने इस स्थिति में विकास प्राधिकरण का दरबाजा खटखटाया है। विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष नगेंद्र प्रताप ने डीएम राजेश कुमार और एसडीएम छाता सुरेंद्र सिंह की मौजूदगी में इस आशय की एनओसी देने पर सहमति जता दी है, इससे मुआवजा राशि किसानों के खातों में जा सके, लेकिन किसानों की ओर से अब तक इस दिशा में कोई लिखित कार्रवाई न करने से मामला उलझा हुआ है।