यमुना रिवर फ्रंट पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थगन आदेश के बाद अब जिला प्रशासन पुनर्विचार याचिका के माध्यम से अपना पक्ष रखेगा। कमिश्नर ने शासन से इसकी अनुमति लेने के आदेश डीएम को दिए हैं।
गुरुवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में कमिश्नर चंद्रकांत ने वृंदावन में प्रस्तावित 182 करोड़ रुपये के यमुना रिवर फ्रंट प्रोजेक्ट से संबंधित अफसरों के साथ बैठक की। इस प्रोजेक्ट पर रोक लगाने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के स्थगन आदेश और एनजीटी से जुडे़ सभी पहलुओं पर भी मंथन किया गया।
इस दौरान भारतीय पुरातत्व निदेशालय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी को लेकर भी चर्चा हुई। इसके लिए अब तक प्रदूषण बोर्ड के स्तर से कोई कार्रवाई शुरू न करने के लिए क्षेत्रीय अधिकारी को कड़ी फटकार भी लगाई।
तय किया गया प्रोजेक्ट क्षेत्र दो किलोमीटर के दायरे में यमुना किनारे गंदे पानी को रोकने के लिए पाइप लाइन (नाला) को खुले रूप में यमुना में न छोड़ा जाए। इसके लिए एसटीपी की स्थापना हो, यहां तक पाइप लाइन पहुंचे।
इस प्रोजेक्ट के तहत होने वाले सुंदरीकरण की रिपोर्ट भारतीय पुरातत्व निदेशालय के समक्ष रखते हुए एनओसी लें। इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाए।
बैठक में डीएम नितिन बंसल, सीडीओ मनीष कुमार वर्मा, एमवीडीएम उपाध्यक्ष सीपी सिंह सहित पर्यटन, वन, जल निगम, प्रदूषण, पालिका, सिंचाई से जुडे़ अफसर मौजूद रहे।
एनजीटी में 14 को शपथ पत्र देंगे कमिशभनर
गोवर्धन परिक्रमा मार्ग में निर्माण को लेकर कमिश्नर आगरा को शपथ पत्र दाखिल करना है। इससे जुडे़ पहलुओं पर कमिश्नर ने अफसरों के साथ चर्चा की। इस दौरान एमवीडीए उपाध्यक्ष सीपी सिंह ने बताया कि महायोजना के बाद परिक्रमा क्षेत्र में 21 अवैध निर्माण हुए हैं। इसमें से नौ के ध्वस्तीकरण के आदेश हो चुके हैं। 12 के खिलाफ कार्रवाई प्रस्तावित है। गौरतलब रहे एनजीटी ने परिक्रमा मार्ग में निर्माण हटाने के आदेश दिए हैं। इस आदेश के क्रियान्वयन से छह गांव प्रभावित होंगे।