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बिना किताब के ऑनलाइन पढ़ाई हो रही प्रभावित

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मथुरा। लॉकडाउन में स्कूल-कॉलेज सभी बंद हैं। छात्र-छात्राओं को शिक्षित करने के लिए ऑनलाइन क्लास शुरू की गई हैं। किताब-कॉपी न मिलने के कारण बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई प्रभावित हो रही है। अभिभावकाें ने स्टेशनरी की दुकान आवश्यक सेवाओं में शामिल करने की मांग प्रशासन से की है।
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अशोक राज सिंह बताते हैं कि लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई तो विद्यालयों के स्तर से शुरू करा दी गई है, लेकिन संबंधित पुस्तक बच्चों के पास नहीं हैं। इससे उन्हें परेशानी आ रही है। घीया मंडी निवासी चेतन अग्रवाल कहते हैं कि बगैर पाठ्यपुस्तकों के ऑनलाइन पढ़ाई कारगर नहीं हो पा रही है। प्रशासन को स्टेशनरी की दुकान खोलनी चाहिए। श्रीजी गार्डन टू नितिन शर्मा कहते हैं कि जिस प्रकार खानपान की दुकान खुल रही है, उसी प्रकार निर्धारित समय पर किताब-कॉपी की दुकान भी खुलनी चाहिए। इसके लिए स्थानीय दुकानदारों को व्हाट्एप पर पर्चा भेजने की व्यवस्था हो।
अभिभावक को सिर्फ दुकान पर तैयार पैकिंग को लाने और भुगतान की अनुमति मिलनी चाहिए। गोविंद नगर निवासी राज सरन कहते हैं कि लॉकडाउन में बच्चे घरों पर हैं। ऑनलाइन पढ़ाई ने उनकी व्यस्तता बढ़ा दी है, लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई के लिए सहयोगी शिक्षण सामग्री तो आवश्यक है। इसके लिए प्रशासन को विचार करना चाहिए।
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अभिभावकों पर पहुंच रहे फीस के मैसेज
प्रदेश सरकार ने संकट के इस दौर में विद्यालयों से फीस न लेने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन जनपद के कई विद्यालय अभिभावकों के मोबाइल पर फीस जमा करने का मैसेज भेज रहे हैं। इसे लेकर अभिभावकों में बैचेनी बढ़ गई है। कई अभिभावकों ने ऐसे विद्यालयों की शिकायत भी जिला प्रशासन को दर्ज कराई है।
विद्यालयों ने वेतन से हाथ झाड़े
निजी क्षेत्र के विद्यालयों ने अपने शिक्षक और कर्मचारियों को इस संकट के दौर में वेतन देने से मना कर दिया है। इससे शिक्षकों के परिवारों में दो वक्त के भोजन का संकट खड़ा हो गया है। सदर क्षेत्र में सीबीएसई से जुड़े एक निजी विद्यालय के शिक्षकों ने इसकी शिकायत शुक्रवार को डीआईओएस ऑफिस पहुंचकर की है।
अभिभावकों ने डीएम से लगाई गुहार
अभिभावकों ने डीएम से स्टेशनरी की दुकान खुलवाने की गुहार लगाई है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को अगली कक्षाओं में प्रमोट कर दिया गया है। किसी भी बच्चे पर किताबें नहीं हैं। ऐसे में ऑनलाइन शिक्षा प्रभावित हो रही है। नौगांव के करन सिंह, सिहाना के रामजीत सिंह, राजपाल सिंह, चौमुंहा के प्रहलाद सोनी, केशव अग्रवाल, विनोद अग्रवाल, प्रदीप शर्मा, योगेश वशिष्ठ, डॉ. छीतर सिंह, भोला प्रधान, सीताराम आदि का कहना है कि बच्चों के पास किताबें नहीं हैं। संवाद
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